सुल्तानपुर : देशव्यापी लॉकडाउन ! व्यक्ति को परिस्थितियो से लड़ने की है जरूरत - सौरभ गुप्ता
वैश्विक महामारी में व्यक्ति को स्वयं सतर्कता एवं बचाव की है जरूरत
अखण्डनगर।
स्पेशल डेस्क
तहलका 24x7
जीवन की विडंबना है कि हम दूसरों की बराबरी या फिर दूसरों की नजरों में चढ़ने का बोझ लिए जीते हैं। हंसता हुआ चेहरा, अच्छी बातें, ज्यादा असर करती है, मगर हम तो उदासी को ओढ़े रहते हैं। हम अपने दिमाग की गरीबी से बाहर नहीं आ पाते हैं, तो कैसे भीतर की खुशहाली से रूबरू हो पाएंगे। उत्सव हमारे भीतर है, हम उसकी ताकत को भूलते जा रहे हैं। खुशी हमारे उत्सवी होने में हैं, जो कि हमारे जीवन में काफी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है लेकिन हम यह प्रयास करते रहते हैं, कि जीवन अनमोल है, जो खुशियों को ढूंढती रहती है। उत्साह व्यक्ति के अंदर छिपी हुई है, उसको जागृत करने की जरूरत है। उत्साह का जागृत होना व्यक्ति को हर कदम पर हर कार्य में बहुत सहायक होता है, लेकिन हम बाहर उत्सव सोचते ही रह जाते हैं, सिर्फ बाजार, रीति-रिवाज एवं धन को कोसने से क्या होगा, जब हम खुद ही उसकी चमक को पाने के लिए मचलते रहते हैं, जिंदगी में शांति, हालात को ठीक करने से नहीं मिलती, बल्कि यह जान लेने से मिलती है कि आप भीतर से क्या है ।
जीवन में बहुत कुछ खूबसूरत है, अगर कोई कहे कि अपने जीवन की खूबसूरत चीजों के बारे में सोचें तो कितनी चीजों की ओर ध्यान जाने लगता है, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, धरती, आकाश, सूरज, चांद सितारे, पर्व त्योहार, और हमारे अपने लोग, पर हम खुद भी तो कम उत्सवप्रिय नहीं है, खूबसूरत और उत्सवप्रिय चीजों की गिनती में हम खुद को गिनना क्यों भूल जाते हैं? कहा जाता है कि हम सुंदरता पैदा करने की कोशिशों में इतने खोए रहते हैं की असल सुंदरता को देख ही नहीं पाते, जीवन की वास्तविक उत्सव प्रियता भीतर से ही उद्घाटित होता है, स्वयं से साक्षात्कार ही वास्तविक आनंद है। स्वयं को नजरअंदाज ना करें, मन की सुनना और मन के करीब होना ही अपूर्व खुशी दे सकता है, जो व्यक्ति के उत्साह को आगे ले जाता है, और मन के शांति के साथ-साथ जो भी कार्य करने की प्रेरणा मिलती है, उसको करने में सहर्ष व्यक्ति का हर कदम अपने आप चलता रहता है।
व्यक्ति अपने जीवन में तमाम प्रकार के विडंबना ओ से घिरा रहता है इस विडंबना से निकलने के लिए व्यक्ति को अंदर की उत्साह और प्रेरणा की जरूरत होती है, प्रेरणा के माध्यम से व्यक्ति को सीख प्राप्त होती है, सीखने के प्रयास में जितना उत्साह अंदर से मिलती है। व्यक्ति उतना ही आगे चलता रहता है, किसी कार्य को करने के लिए उत्साह की जरूरत होती है, अंदर की उत्साह कार्य की प्रेरणा व्यक्ति को आगे ले जाता है, सफलता की मंजिल तक पहुंचना आसान बना देती है, इसलिए जीवन में सफलता के लिए प्रेरणा, उत्साह और सीखना व्यक्ति के अंदर विद्यमान होना चाहिए, जिससे व्यक्ति अपने मंजिल को सरलता पूर्वक पहुंचने में उत्साह के साथ सार्थकता का प्रयोग आसानी से कर सके, एवं जिस कार्य के लिए प्रगति चाहता है, वह उसे प्राप्त हो सके, उत्साह एवं प्रेरणा सार्थक सिद्ध हो सके, जो कि जीवन में विद्यमान आवश्यक बुद्धिमता का प्रयोग के साथ साथ अपनी सफलता का मंज्जिल अपने आप मिल जाता है। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अपील को जिस प्रकार से सार्थक हम सब लोग मिलकर बनाए हैं ठीक उसी प्रकार आगे बनाए रखें इसमें हम लोगों के लिए सबसे अधिक अच्छी खबर मिलेगी एवं साथ ही साथ कोरोना वायरस पर विजय प्राप्त होगी यह हमारी जनपद वासियों से यह एक आग्रह है देश के साथ-साथ जीवन को बचाना है तो सतर्कता धैर्य एवं बचाव को जारी रखते हुए गांव तक संदेश पहुंचाना बहुत जरूरी है। क्योंकि एक एक व्यक्ति का जीवन अनमोल है।
लेखक डॉ सौरभ कुमार गुप्ता शिवनाथ वर्मा स्मारक पीजी कॉलेज देवनगर खानपुर पिलाई सुल्तानपुर में वाणिज्य संकाय के विभागाध्यक्ष हैं।

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