मुम्बई : 3 महान विभूतियों को आज महामहिम देंगे "भारत रत्न"
मुम्बई।
मुकेश सेठ
तहलका 24x7
राष्ट्रपति भवन ने तीन महान विभूतियों को भारत रत्न देने की घोषणा की। चुनावी साल में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, नानाजी देशमुख व भूपेन हजारिका को भारत रत्न देकर नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़े संदेश दे दिए हैं। भारत सरकार ने 26 जनवरी के मौके पर नाना जी देशमुख, भूपेन हजारिका और प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न देने का फैसला किया। इनमें नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका को ये सम्मान मरणोपरांत दिया गया है, जबकि कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रणब मुखर्जी भारत के पूर्व राष्ट्रपति रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन तीन महानुभावो को भारत रत्न दिए जाने पर अलग अलग ट्विट करके इनके योगदानों के बारे में बताया है।
# पीएम मोदी ने भारत रत्न प्राप्त महानुभावों के कार्यों को किया याद
पीएम नरेंद्र मोदी ने नानाजी के बारे में लिखा कि ग्रामीण विकास के लिए नानाजी देशमुख के महत्वपूर्ण योगदान ने हमारे गांवों में रहने वाले लोगों को सशक्त बनाने के एक नए प्रतिमान की राह दिखाई। वह दलितों के प्रति विनम्रता, करुणा और सेवा का परिचय देता है। वह सही अर्थों में भारत रत्न हैं। पीएम मोदी ने भूपेन हजारिका के बारे में लिखा कि भूपेन हजारिका के गीत व संगीत पीढ़ियों से लोगों द्वारा सराहे जाते हैं। उनसे न्याय, सौहार्द और भाईचारे का संदेश जाता है। उन्होंने विश्व स्तर पर भारत की संगीत परंपराओं को लोकप्रिय बनाया। प्रसन्नता है कि भूपेन दा को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने एक समय पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को अपना फादर फीगर बताया था। उन्होंने कहा था कि प्रणब दा से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला है। उनको भारत रत्न सम्मान दिए जाने की घोषणा के बाद पीएम मोदी ने कहा कि प्रणब दा हमारे समय के एक उत्कृष्ट राजनेता हैं। उन्होंने दशकों तक देश की निस्वार्थ और अथक सेवा की है, जिससे देश के विकास पथ पर एक मजबूत छाप छोड़ी है। वे ज्ञान व बुद्धि के मामले में सर्वोत्तम हैं। मैं काफी प्रसन्न हूं कि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया है।
# नानाजी देशमुख ने समाजसेवा को अपना रास्ता बनाया
सामाजिक कार्यकर्ता नानाजी देशमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनसंघ से जुड़े थे, जबकि भूपेन हजारिका देश के नामचीन संगीतकार और गायक रहे हैं। एक भारतीय समाजसेवी थे। नानाजी देशमुख पूर्व में भारतीय जनसंघ के नेता थे। 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार बनी, तो उन्हें मोरारजी-मन्त्रिमण्डल में शामिल किया गया। हालांकि उन्होंने यह कहकर कि 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को सरकार से बाहर रहकर समाज सेवा का कार्य करने की बात कर मंत्री पद ठुकरा दिया।
# नानाजी ने ठुकरा दिया था केंद्रीय मंत्री का पद
नानाजी देशमुख जीवन पर्यन्त दीनदयाल शोध संस्थान के अन्तर्गत चलने वाले विविध प्रकल्पों के विस्तार के लिए कार्य करते रहे। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने उन्हें राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया। अटल जी के कार्यकाल में ही भारत सरकार ने उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य व ग्रामीण स्वालम्बन के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान के लिये पद्म विभूषण भी प्रदान किया। नानाजी ने शिक्षा पर बहुत जोर दिया। उन्होंने पहले सरस्वती शिशु मन्दिर की स्थापना गोरखपुर में की।
# विलक्षण प्रतिभा के धनी रहे भूपेन हजारिका
भूपेन हजारिका असम के एक बहुमुखी प्रतिभा के गीतकार, संगीतकार और गायक थे। इसके अलावा वे असमिया भाषा के कवि, फिल्म निर्माता, लेखक और असम की संस्कृति और संगीत के अच्छे जानकार भी रहे थे। वे भारत के ऐसे विलक्षण कलाकार थे जो अपने गीत खुद लिखते थे, संगीतबद्ध करते थे और गाते थे। उन्हें दक्षिण एशिया के श्रेष्ठतम जीवित सांस्कृतिक दूतों में से एक माना जाता है। उन्होंने कविता लेखन, पत्रकारिता, गायन, फिल्म निर्माण आदि अनेक क्षेत्रों में काम किया।
# शानदार गायक भी थे भूपेन हजारिका
भूपेन हजारिका के गीतों ने लाखों दिलों को छुआ। हजारिका की असरदार आवाज में जिस किसी ने उनके गीत दिल हूम हूम करे और ओ गंगा तू बहती है क्यों सुना है, वह इससे इंकार नहीं कर सकता कि उसके दिल पर भूपेन दा का जादू नहीं चला। अपनी मूल भाषा असमिया के अलावा भूपेन हजारिका हिंदी, बंगला समेत कई अन्य भारतीय भाषाओं में गाना गाते रहे थे। उनहोने फिल्म गांधी टू हिटलर में महात्मा गांधी का पसंदीदा भजन वैष्णव जनतो गाया था। उन्हें पद्मभूषण सम्मान से भी सम्मानित किया गया था।
# प्रणब मुखर्जी है सभी दलों में स्वीकार्य
डा. प्रणब मुखर्जी भारत के 13वें व पूर्व राष्ट्रपति रह चुके हैं। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित किया। सीधे मुकाबले में उन्होंने अपने प्रतिपक्षी प्रत्याशी पीए संगमा को हराया। उन्होंने 25 जुलाई 2012 को भारत के 13वें राष्ट्रपति के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। प्रणब मुखर्जी ने किताब द कोलिएशन ईयर्स: 1996-2012 लिखा है। डा. मुखर्जी को सभी दलों में एक समान प्रेम मिलता रहा है।


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