वैश्विक महामारी में स्वंय को लॉकडाउन कर करिए देश की सच्ची सेवा - श्रीकांत मिश्रा
लॉकडाउन के दौरान मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए न हों विचलित
लॉकडाउन के दौरान समाज के अंतिम पायदान के लोगों का रखे विशेष ध्यान
जौनपुर।
रवि शंकर वर्मा
तहलका 24x7
जनपद के गौरव "अमरावती रेजीडेंसी प्रा. लि." के प्रबंधन कमेटी के सदस्य श्रीकांत मिश्रा ने वैश्विक महामारी कोरोना से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा आह्वानित लॉकडाउन को सफल बनाने के लिए सभी प्रबुद्ध जनों से अपील की है। श्रीकांत मिश्रा ने "तहलका 24x7 न्यूज़" से विशेष बातचीत में बताया कि कोरोना वायरस के प्रकोप से बचने के लिए सबसे सही उपाय वायरस के संक्रमण से बचाव ही है। इस विकट आपदा से निपटने के लिए इसके संक्रमण को रोकना अति आवश्यक है। संक्रमण का खतरा तभी रूक सकता है जब सभी प्रबुद्ध जन स्वतः जागरूक होगें। इस मद्देनजर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 21 दिन का लॉकडाउन किया है जिसे सफल बनाने में सभी प्रबुद्ध जन अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
सूबे की राजधानी स्थित रियल एस्टेट के क्षेत्र में परचम लहराने वाले "अमरावती रेजीडेंसी प्राईवेट लिमिटेड" के प्रबंधक कमेटी के सदस्य व जनपद के गौरव श्रीकांत मिश्रा ने प्रबुद्ध जन एवं सुविधा सम्पन्न लोगों से अपील की है कि इस लॉकडाउन के दौरान रोजाना खाने कमाने वाले समाज के अंतिम पायदान के लोगों का विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। आप अपने आस पड़ोस में ऐसे लोगों को के मूलभूत आवश्यकताओं का पूरा ध्यान रखें उन्हें खान पान एवं दवा की कोई कमी न होने पाए। 21 दिन के लॉकडाउन में सबसे ज्यादा समाज के अंतिम पायदान के लोग ही प्रभावित होगें। आपकी थोड़ी सी जागरूकता से इन लोगों को बहुत राहत मिल सकती है।
वहीं श्रीकान्त जी ने कहा कि इस अति विकट स्थिति में विचलित होने की आवश्यकता नहीं है बल्कि बहुत ही धैर्य से काम करने की आवश्यकता है। मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विचलित होकर जमाखोरी न करें। दूध, अनाज, दवा, फल सब्जियों की कोई कमी नहीं है। इन मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सरकार ने भी समय निर्धारित किया है और बहुत से कस्बों में प्रशासन ने डोर टू डोर आपूर्ति कराने की व्यवस्था कर दी है। अपने एवं अपने परिजनों शुभचिंतकों की मंगलमयी जीवन के लिए आपको लॉकडाउन का पालन पूरी निष्ठा से करना होगा और अपने आस-पास के लोगों को जागरूक भी करना होगा यह भी देश सेवा ही है।



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