वाराणसी : भारत की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे है पड़ोसी देश - प्रो. संजय

वाराणसी : भारत की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे है पड़ोसी देश - प्रो. संजय



वाराणसी।
घनश्याम गुप्ता
तहलका 24x7
                            भारत के पड़ोसी देशों ने कभी भी यहाॅ की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सहमति नहीं जताई क्योंकि पड़ोसी देश खासतौर से पाकिस्तान जो सदैव से सैन्य शासन के प्रभाव में रहा है वह लोकतंत्र से कभी सहमत नही हो सकता उक्त बातें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेन्टर फार साउथ एशियन स्टडी, नई दिल्ली के चैयरमैन प्रोफेसर संजय भारद्वाज ने गुरुवार को डीएवी पीजी कॉलेज में आयोजित "भारत की पड़ोस नीति, गतिशीलता, चुनौतियाॅ एवं संभावनाएं" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता कही। राजनीति शास्त्र विभाग के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रोफेसर संजय भारद्वाज ने कहा कि पड़ोसी देश अब भारत की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखने लगे हैं क्योंकि हाल के दिनों में कई ऐसे मौके आए हैं जब भारत ने बिना किसी भेदभाव के पड़ोसियों को संकटकाल में मदद को हाथ आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर कभी भी पड़ोसी देशों के साथ नीतियां ना बन सकती हैं और ना चल सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक क्षेत्रीय महाशक्ति के रूप में उभर कर सामने आया है, इसी मजबूत अमेरिका ने भारत से परमाणु समझौता करने के लिए सन् 2005 में अपने संविधान में संशोधन किया जबकि भारत ने 1947 से लेकर 2019 तक अमेरिका को लेकर अपनी विदेश नीति में तनिक भी बदलाव नहीं किया।


संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता नई दिल्ली से आए विदेश नीति के जानकार प्रोफेसर मधुरेंद्र कुमार ने कहा कि कि आज पड़ोसी देशों के साथ ऐसे रिश्ते की आवश्यकता है जिससे समेकित विकास की संकल्पना विकसित हो सके। साथ ही उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ चल रही विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत की लोकतांत्रिक शक्ति ही दुनिया में उसे सिरमौर बनाने के लिए प्रेरित करती है। नई दिल्ली से आई समत एस पटनायक ने कहा कि भारत के पड़ोसी देशों को चीन बड़ी मात्रा में हथियारों की सप्लाई करता है जो भारत के लिए एक चुनौती है इसलिए इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के पड़ोसी देशों के साथ सांस्कृतिक, आर्थिक संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डाॅ. अरूण श्रीवास्तव ने किया। संगोष्ठी का संचालन प्रियंका सिंह, स्वागत डाॅ. शिव बहादुर सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. स्वाती सुचरिता नन्दा ने दिया। इस अवसर पर डाॅ. मधु सिसौदिया, डाॅ. राकेश कुमार द्विवेदी, डाॅ. समीर पाठक, डाॅ. मुकेश कुमार सिंह, डाॅ. प्रतिमा गुप्ता, डाॅ. अरविन्द वर्मा आदि उपस्थित रहे।

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