वाराणसी : जैविक खेती से ही विषमुक्त खाद्यान्न उत्पादन सम्भव
नमामि गंगे योजनान्तर्गत कैथी मे कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम
वाराणसी।
घनश्याम गुप्ता
तहलका 24x7
जैविक खेती को अपनाने से जहाँ एक ओर पर्यावरण की सुरक्षा होती है वहीं दूसरी ओर विषमुक्त खाद्यान्न का उत्पादन भी सम्भव होता है। इसलिए यह जरूरी है कि किसान जैविक खेती अपनाकर कृषि उत्पादन को स्थायित्व प्रदान करें। उक्त सलाह खण्ड तकनीकी प्रबंधक देवमणि त्रिपाठी ने सोमवार को क्षेत्र के कैथी गाँव मे आयोजित कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम मे किसानों को दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा संचालित नमामि गंगे योजना का क्रियान्वयन गंगा नदी के किनारे स्थित ग्रामो मे क्लस्टर का गठन करके जैविक खेती के माध्यम से वर्तमान मे प्रचलित कृषि पद्धति से गंगा में होने वाले प्रदूषण को न्यूनतम स्तर तक ले आने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम मे उपस्थित किसानों को जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्ट यूनिट का निर्माण, बर्मी कम्पोस्ट से लाभ के साथ ही नमामि गंगे योजना के सम्बंध मे विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की गयी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रगतिशील कृषक दिनेश सिंह ने उपस्थित किसानों से नमामि गंगे योजना का लाभ उठाने की अपील की। कार्यक्रम का संचालन व धन्यवाद ज्ञापन शशांक सिंह ने किया। इस दौरान सहायक तकनीकी प्रबंधक पंकज भास्कर, श्रवण कुमार सिंह, देवेन्द्र प्रताप सिंह, दिनेश यादव, योगेन्द्र गिरि आदि उपस्थित रहे।
# चौबेपुर क्षेत्र के पाँच गाँवों का चयन
खण्ड तकनीकी प्रबंधक देवमणि त्रिपाठी ने बताया कि नमामि गंगे योजनान्तर्गत चौबेपुर क्षेत्र के पाँच गाँवों का चयन किया गया है।जिसमे कैथी सहित गौरा उपरवार, चंद्रावती, ढाका और मोलनापुर शामिल हैं। उन्होंने बताया उपरोक्त गंगा किनारे स्थित गाँवों मे प्रथम चरण का प्रशिक्षण पूर्ण कर लिया गया है और वर्मी कम्पोस्ट यूनिट के निर्माण का कार्य प्रगति पर है। गंगा नदी के जल को प्रदूषण से मुक्त करने व गंगा को स्वच्छ रखने के उद्देश्य से इन सभी गाँवों मे जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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