जौनपुर : "सियासत की अपनी अलग इक जबां है.. लिखा हो जो इकरार तो इनकार पढ़ना.." नहीं समझ पाए बुढ़ूपुर गांव वासी

जौनपुर : "सियासत की अपनी अलग इक जबां है.. लिखा हो जो इकरार तो इनकार पढ़ना.." नहीं समझ पाए बुढ़ूपुर गांव वासी



सांसद द्वारा गोद लिए गांव बुढ़ूपुर की विकास समीक्षा कार्यक्रम सम्पन्न, सांसद समेत जिला मुख्यालय से सभी विभागों के उच्चपदासीन अधिकारी रहे गैरमौजूद



समीक्षा कार्यक्रम में लगा शिकायतों का अम्बार, विकास की परछाईं से कोसों दूर है बुढ़ूपुर गांव


शाहगंज।
रवि शंकर वर्मा 
तहलका 24x7
                     लोकसभा चुनाव कभी भी दस्तक दे सकता है इसी मद्देनजर सरकार द्वारा किए गए कार्यों को भाजपा कार्यकर्ता जन जन तक पहुंचाने में तल्लीन हैं। इसी कड़ी में सांसद केपी सिंह द्वारा गोद लिए गांव तहसील क्षेत्र अंतर्गत बुढ़ूपुर ग्राम की विकास समीक्षा कार्यक्रम का आयोजन वृहस्पतिवार को किया गया। समीक्षा कार्यक्रम में सांसद एवं मुख्य विकास अधिकारी नहीं पहुंचे तो लोक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग एवं पुलिस विभाग का एक भी अधिकारी नहीं पहुंचा। विकास समीक्षा कार्यक्रम बस औपचारिकता भर रह गया।

बुढ़ूपुर गांव को जब सांसद द्वारा गोद लिया गया था तब ग्रामीणों में एक आस जगी थी कि अब गांव का विकास हो जाएगा और बुढ़ूपुर गांव आदर्श गांव बन जाएगा।  सांसद केपी सिंह का लगभग पूरा कार्यकाल बीतने को है लेकिन विकास की परछाईं भी बुढ़ूपुर गांव की सरहद को नहीं छू पाई है। समीक्षा कार्यक्रम में विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, शौचालय, आवास, नाली, सड़क, खड़ंजा, हैंडपंप आदि समेत शिकायतों का अम्बार लगा रहा। कार्यक्रम विकास समीक्षा से बदल कर शिकायत समीक्षा में तब्दील हो गया। खुले में शौच मुक्त के लिए भारत सरकार द्वारा युद्ध स्तर पर मुहिम चलाई गई बावजूद इसके बुढ़ूपुर गांव शत प्रतिशत खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) नहीं हो सका है जबकि उक्त गांव को सांसद ने गोद लिया है बड़े हैरत की बात है।


विकास समीक्षा कार्यक्रम में मौजूद सांसद प्रतिनिधि अजीत प्रजापति, मण्डल अध्यक्ष विनय सिंह एवं मण्डल महामंत्री चिंताहरण शर्मा ने बारी बारी से ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और जल्द से जल्द उनके समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन दिया। मौजूद भाजपा जनप्रतिनिधियों द्वारा पशुओं के टीकाकरण के बाबत पूछे जाने पर ग्रामीणों ने बताया कि "साहेब जानवरन कऽ टीका तऽ हरदमै लागत हौ, लेकिन अदमियन कऽ कहियो नाऽ लागत"

"सियासत की अपनी अलग इक जबां है.. 
लिखा हो जो इकरार तो इनकार पढ़ना.." यह चंद लाइन बुढ़ूपुर गांव निवासियों के लिए सटीक मालूम पड़ती है। बुढ़ूपुर गांववासी सांसद द्वारा गोद लेने के "इकरार" को" "इनकार" नहीं समझ पाए।

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