सुल्तानपुर : लोकप्रिय कवि दूधनाथ शर्मा "श्रीष" जी के निधन पर शोकसभा आयोजित
कादीपुर।
अमरीश मिश्रा
तहलका 24x7
चर्चित साहित्यिक संस्था अवधी मंच ने कवि सम्मेलनों के अत्यंत लोकप्रिय कवि दूधनाथ शर्मा "श्रीष" के निधन पर शोकसभा आयोजित कर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। शोकसभा की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.आद्या प्रसाद सिंह 'प्रदीप' ने कहा कि 19 नवम्बर 1919 को जौनपुर के महारेव ग्राम में जन्मे उ.प्र. हिंदी संस्थान के साहित्यभूषण सम्मान से अलंकृत" श्रीष" जी ने शतक से 9 दिन अधिक जी कर अंतिम सांस ली। बुधवार को काशी के मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अवधी मंच के सचिव युवा साहित्यकार ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह 'रवि' ने कहा कि अवधीमंच के कार्यालय विक्रम भवन पर "श्रीष" जी का आगमन कई बार हुआ था। उम्र और सक्रियता के बारे में पूछने पर "श्रीष" जी सदैव कहा करते थे 'चिंता मत करो रवि सौ पार करके ही जाऊंगा'। आशुकवि मथुरा प्रसाद सिंह 'जटायु' ने कहा कि कोकिल कंठी "श्रीष" जी मंचो पर श्रृंगारिक कविताओं के लिए सदैव याद किये जाते रहेंगे। उन्होंने बताया कि सुलतानपुर जनपद से "श्रीष" जी का आत्मीय सम्बंध था। संत तुलसीदास स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ.सुशील कुमार पाण्डेय साहित्येन्दु ने कहा कि पं.दूधनाथ शर्मा "श्रीष" का काव्य ग्रामीण जनता के भावों की अभिव्यक्ति है। शोकसभा में संत तुलसीदास पी.जी कालेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. करुणेश भट्ट, चर्चित व्यंग्यकार ब्रजेश कुमार पाण्डेय 'इन्दु', संकठा प्रसाद सिंह देव एवं ओंकार नाथ श्रीवास्तव आदि ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कवि "श्रीष" को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किया।
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अमरीश मिश्रा
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चर्चित साहित्यिक संस्था अवधी मंच ने कवि सम्मेलनों के अत्यंत लोकप्रिय कवि दूधनाथ शर्मा "श्रीष" के निधन पर शोकसभा आयोजित कर श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। शोकसभा की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.आद्या प्रसाद सिंह 'प्रदीप' ने कहा कि 19 नवम्बर 1919 को जौनपुर के महारेव ग्राम में जन्मे उ.प्र. हिंदी संस्थान के साहित्यभूषण सम्मान से अलंकृत" श्रीष" जी ने शतक से 9 दिन अधिक जी कर अंतिम सांस ली। बुधवार को काशी के मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
अवधी मंच के सचिव युवा साहित्यकार ज्ञानेन्द्र विक्रम सिंह 'रवि' ने कहा कि अवधीमंच के कार्यालय विक्रम भवन पर "श्रीष" जी का आगमन कई बार हुआ था। उम्र और सक्रियता के बारे में पूछने पर "श्रीष" जी सदैव कहा करते थे 'चिंता मत करो रवि सौ पार करके ही जाऊंगा'। आशुकवि मथुरा प्रसाद सिंह 'जटायु' ने कहा कि कोकिल कंठी "श्रीष" जी मंचो पर श्रृंगारिक कविताओं के लिए सदैव याद किये जाते रहेंगे। उन्होंने बताया कि सुलतानपुर जनपद से "श्रीष" जी का आत्मीय सम्बंध था। संत तुलसीदास स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ.सुशील कुमार पाण्डेय साहित्येन्दु ने कहा कि पं.दूधनाथ शर्मा "श्रीष" का काव्य ग्रामीण जनता के भावों की अभिव्यक्ति है। शोकसभा में संत तुलसीदास पी.जी कालेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. करुणेश भट्ट, चर्चित व्यंग्यकार ब्रजेश कुमार पाण्डेय 'इन्दु', संकठा प्रसाद सिंह देव एवं ओंकार नाथ श्रीवास्तव आदि ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कवि "श्रीष" को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किया।


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