जौनपुर : तहलका 24x7 न्यूज़ एक्सक्लूसिव !! साढ़े तीन दशक से नगर पालिका के कब्जे से बाहर है करोड़ों की बेशकीमती जमीन

जौनपुर : तहलका 24x7 न्यूज़ एक्सक्लूसिव  !! साढ़े तीन दशक से नगर पालिका के कब्जे से बाहर है करोड़ों की बेशकीमती जमीन 



जिला बनने की सुगबुगाहट से नगर क्षेत्र की बेशकीमती जमीनों पर भू माफियाओं की हुई निगाहें टेढ़ी 



रवि शंकर वर्मा व फूल कुमार प्रजापति की विशेष रिपोर्ट


शाहगंज।
स्पेशल डेस्क
तहलका 24x7
                  लोकसभा चुनाव करीब आ रहा है ऐसे में तमाम लुभावने दावों वादों जुमलों का पिटारा जनप्रतिनिधियों ने खोलना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में हाल में ही शाहगंज को जिला बनाए जाने की  सुगबुगाहट ने चर्चाओं का माहौल गर्म कर दिया तो भूमाफिया भी जाग गए। भूमाफिया अपनी जमीनों का आंकलन कर अगल बगल की जमीनों के उधेड़बुन में लग गये। वैसे तो भूमाफियां इतनी तो पकड़ रखते हैं कि वह जिंदा व्यक्ति को मुर्दा व मुर्दे को जिंदा बना देते हैं। ऐसे कई मामले उच्चाधिकारियों के पास पहुंचते हैं जिसे देख अधिकारी भौचक हो जाते हैं। बात की जा रही है नगर पालिका परिसीमन अंदर नपा की बेशकीमती जमीन की जिसपर अब भूमाफियाओं की निगाहें टेढ़ी होना शुरू हो गई है। 


"तहलका 24x7 न्यूज़"  को प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार विगत 24 जुलाई 1984 में नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत पुरानी बाजार मोहल्ला स्थित नगर पालिका प्राथमिक विद्यालय के ठीक बगल नगर पालिका परिक्षेत्र की 36 डिसमिल बेशकीमती जमीन (सार्वजनिक) को भू माफियाओं ने अभिलेखों में हेराफेरी कराकर अपना नाम जुड़वा लिया था और कुछ भूमि का बैनामा भी हो चुका था। जिसकी जानकारी शाहगंज के समाजसेवियों को हुई थी तो इसकी शिकायत की गई। शिकायत पर तत्कालीन परगना अधिकारी शाहगंज ने बैनामा वायड होने की परिस्थिति में संपूर्ण भूमि को भादी ग्राम सभा (अंदर नगर पालिका) में निहित करने का आदेश पारित कर दिया था। जिस पर फर्जी वाड़ा करने वाले भूमाफियाओं ने कमिश्नरी में अपील किया जहाँ अपर आयुक्त द्वितीय वाराणसी मंडल ने विगत 8 मार्च 1990 को उक्त आदेश को सही बताते हुए अपील आपत्ति को निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद भी नगर पालिका का उक्त भूमि पर कब्जा नही ले सका।



नगर के आरटीआई एक्टिविस्ट व थाना अपराध निरोधक कमेटी के तहसील अध्यक्ष प्रशांत अग्रहरि ने विगत 10 अप्रैल 2007 को सूचना के अधिकार के तहत उक्त भूमि के संदर्भ में तत्कालीन तहसीलदार से सूचना मांगी थी परंतु तहसीलदार ने मामले को न्यायालय में विचाराधीन बताते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया था तब प्रशांत अग्रहरी ने अपर आयुक्त तथा परगना अधिकारी के आदेश के अनुपालन न करने हेतु दोषी अधिकारियों कर्मचारियों तथा उनके विरुद्ध कार्रवाई किये जाने की जानकारी मांगी थी तब भी समय पर सूचना न देने पर विगत 23 जून 2007 को मंडलायुक्त वाराणसी के यहां अपील की गई जिसके बाद मंडलायुक्त ने मामले को गम्भीरता से लिया और जनपद के तत्कालीन जिलाधिकारी को निर्देशित किया तो जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी को 3 दिन के भीतर सूचना देने का निर्देश दिया था अपनी गर्दन फंसता देख तहसील प्रशासन ने आनन-फानन में उक्त भूमि का अमल दरामद कर दिया था परंतु आज तक उक्त जमीन पर अभी तक नगर पालिका अपना कब्जा नहीं जमा सका और ना ही उक्त जमीन का सीमांकन कर बाउंड्री वॉल कराया गया और न ही उसका सुंदरीकरण हो सका।



मौके की स्थिति यह है कि 36 डिसमिल जमीन के चारों तरफ से भू माफियाओं की निगाहें टेढ़ी हैं। अगल बगल के लोग कुछ न कुछ बढ़कर भवन बनवा नपा की बेशकीमती जमीन पर कब्जा कर लिए हैं। इसी के चलते उसका रास्ता भी सकरा हो गया है। सबसे खास बात है कि समाज सेवियों द्वारा लड़ी गई इतनी लंबी लड़ाई के प्रति तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों की नरमी के चलते भू माफियाओं ने अभिलेखों में हेरफेर करके बड़ा खेल खेला।



सूचना के अधिकार के माध्यम से शाहगंज नगर वासियों के लिए बड़ी उपलब्धि कराने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट व थाना अपराध निरोधक कमेटी  शाहगंज के अध्यक्ष प्रशांत कुमार अग्रहरि ने "तहलका 24x7 न्यूज़" से विशेष बातचीत में बताया कि इतनी बड़ी लड़ाई लड़ने के बाद शाहगंज नगर पालिका को जमीन मिली है जिसे नपा को अपने कब्जे में लेना चाहिए क्योंकि नगर पालिका परिषद शाहगंज के पास खुद की जमीन नहीं है जिसके कारण किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं हो पा रहा है। नगर पालिका के पास शौचालय, लाइब्रेरी व पार्क के लिए जमीन नहीं है जिससे नगर वासियों के बच्चों का सर्वांगीण विकास किया जा सके। अगर नगर पालिका परिषद नगर के अंदर की जमीन को अपने कब्जे में नहीं लिया तो भविष्य में एक बार फिर उक्त जमीन किसी प्रभावशाली व्यक्ति के हाथों में चली जाएगी ऐसा नगर में कई जगहों पर हुआ है।









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