जौनपुर : आमंत्रण के तरीके से नाराज उरी शहीद के पिता ने सर्जिकल स्ट्राइक डे कार्यक्रम में जाने से किया इनकार

जौनपुर : आमंत्रण के तरीके से नाराज उरी शहीद के पिता ने सर्जिकल स्ट्राइक डे कार्यक्रम में जाने से किया इनकार


मीडिया और सोशल मीडिया पर खबर चलने के बाद पूर्वान्चल विश्वविद्यालय प्रशासन की कुम्भकरणी तंद्रा टूटी


जौनपुर।
स्पेशल डेस्क 
तहलका 24x7
                यूजीसी ने इस वर्ष सभी विश्वविद्यालयों को "सर्जिकल स्ट्राइक डे" का आयोजन कर शहीदों के सन्दर्भ में संगोष्ठी के आयोजन के लिये आदेश जारी किया था। इसी क्रम में आज 29 सितंबर को पूर्वांचल विश्वविद्यालय "सर्जिकल स्ट्राइक डे" के अवसर पर गोष्ठी का आयोजन किया गया था। इसकी तैयारी पिछले 1 सप्ताह से चल रही थी बावजूद इसके देश की सीमा पर शहीद होने वाले जवानों के परिजनों को कोई आमंत्रण नहीं भेजा गया। इस संवेदनहीनता की खबर कल से ही न्यूज़ पोर्टल, सोशल मीडिया पर मुख्य चर्चा में बनी हुई थी। अपनी किरकिरी होता देख विश्वविद्यालय प्रशासन ने आज सुबह 10.15 बजे डिग्री कॉलेज के प्रवक्ता डॉक्टर आरपी सिंह को उड़ी शहीद राजेश सिंह के पिता राजेंद्र सिंह (भकुरा) के पास भेजा। डॉक्टर सिंह ने शहीद के पिता को आज 11:00 बजे से शुरू होने वाले सर्जिकल "स्ट्राइक डे गोष्ठी" में चलने के लिए आमंत्रण दिया। इस पर शहीद के पिता नाराज हो गए उन्होंने गोष्ठी में जाने से स्पष्ट इनकार कर दिया। उनका कहना था कि अगर आमंत्रण देना ही था तो एक-दो दिन पहले बताना चाहिए था। इस बात की चर्चा जिले से लेकर देश और प्रदेश तक हो रही है कि जिन शहीदों के लिये "सर्जिकल स्ट्राईक डे" का आयोजन किया गया था उन्हीं के परिजनों को ही उपेक्षित कर दिया गया। क्या यही शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है ?



बताते चलें कि दो वर्ष पूर्व आज ही के दिन अपने देश की सेना के जाँबाज कमांडो ने अपनी जान की परवाह न करते हुये पाकिस्तान में घुसकर आतंकियो के कैम्प को तहस नहस करते हुये काफ़ी संख्या में आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा था। इस ऐतिहासिक सर्जिकल स्ट्राइक को करके सेना ने 18 सितम्बर को कश्मीर के उरी में 19 जवानो की शहादत का बदला लिया था। उरी की आंतकी घटना में जौनपुर जिले के करन्जाकला विकास खंड के भकुरा गाँव निवासी राजेन्द्र सिंह का पुत्र राजेश सिंह भी शहीद हो गया था। यह संयोग ही है कि भकुरा गाँव वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर की सीमा से सटा हुआ गाँव है। एक वर्ष के भीतर राज्यपाल श्री राम नाईक व उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा दो-दो बार तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ एक बार विश्वविद्यालय मे आ चुके हैं। लेकिन किसी ने भी उस शहीद का नाम लेना जरुरी नहीं समझा। इसे जिले के भाजपा नेताओं की कमी कहिये या विश्वविद्यालय प्रशासन की निष्क्रियता। शासन और प्रशासन की लापरवाही के चलते स्मृति द्वार भी अधूरा पड़ा हुआ है। आज 29 सितम्बर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने 11 बजे दिन मे "सर्जिकल स्ट्राइक डे" के अवसर पर गोष्ठी का आयोजन किया था लेकिन इस आयोजन में उरी शहीद के परिजनों को बुलाना उचित नहीं समझा। यह खबर न्यूज़ पोर्टल और समाचार पत्रों साथ साथ सोशल मीडिया में भी कल से वायरल हुआ व। इसका नतीजा रहा कि आज विश्वविद्यालय प्रशासन की कुम्भकरणी निद्रा टूटी लेकिन तब तक बात बहुत आगे तक बढ़ चुकी थी।

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