जौनपुर : बेहद शर्मनाक ! सरकार से लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन तक कर रहा उरी शहीद की उपेक्षा
सर्जिकल स्ट्राइक डे की औपचारिकता निभाने में जुटा पूर्वान्चल विश्वविद्यालय प्रशासन
जौनपुर।
स्पेशल डेस्क
तहलका 24x7
आज 28 सितम्बर है, UGC ने इस साल सभी विश्वविद्यालयॊ को आदेश दिया है कि वे सर्जिकल स्ट्राइक डे का आयोजन कर शहीदो के बारे मे गोष्ठी का आयोजन कर जानकारी दें दो वर्ष पूर्व आज ही के दिन अपने देश की सेना के जाँबाज कमांडो ने अपनी जान की परवाह न करते हुये पाकिस्तान में घुसकर आतंकियो के कैम्प को तहस नहस करते हुये काफ़ी संख्या में आतंकवादियो को मौत के घाट उतारा था। इस ऐतिहासिक सर्जिकल स्ट्राइक को करके सेना ने 18 सितम्बर को कश्मीर के उरी में 19 जवानो की शहादत का बदला लिया था। उरी की आतंकी घटना में जौनपुर जिले के करन्जाकला विकास खंड के भकुरा गाँव निवासी राजेन्द्र सिंह का पुत्र राजेश सिंह भी शहीद हो गया था। यह संयोग ही है कि भकुरा गाँव वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर की सीमा से सटा हुआ गाँव है।
डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में नगर विकास राज्य मंत्री गिरीश यादव व विधायक डा हरेन्द्र प्रताप सिंह के अलावा किसी भी जन प्रतिनिधि ने शहीद के गाँव जाना तो दूर उनके परिवार की शिकायतों का निस्तारण तक करना भी मुनासिब नहीं समझा। जबकि एक वर्ष के भीतर राज्यपाल श्री राम नाईक व उप मुख्यमंत्री डा दिनेश शर्मा दो - दो बार तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ एक बार विश्वविद्यालय मे आ चुके हैं। किसी ने भी उस शहीद का नाम लेना भी उचित नहीं समझा। इसे जिले के भाजपा नेताओं की निष्क्रियता समझे या विश्वविद्यालय प्रशासन की नाकामी ! उरी शहीद राजेश सिंह के प्रथम शहादत दिवस पर इन्डियन मेडिकल एसोशियेसन जौनपुर के अध्यक्ष डा एन के सिंह की टीम ने 2.51 लाख की सहायता शहीद के पिता को दिया था। 10 दिन पूर्व दूसरे शहादत दिवस पर व्यापार मंडल अध्यक्ष इन्द्रभान सिंह "इन्दु" द्वारा आयोजित कार्यक्रम में समाजसेवी व उद्योगपति अशोक सिंह ने शहीद की स्मृति में स्मारक स्थल बनवाने की घोषणा की थी। शासन और प्रशासन की लापरवाही के चलते स्मृति द्वार भी अधूरा पड़ हुआ है। कल 29 सितम्बर को विश्वविद्यालय प्रशासन ने सर्जिकल स्ट्राइक डे के अवसर पर गोष्ठी का आयोजन किया है लेकिन इस आयोजन में उरी शहीद के परिजनों को बुलाना उचित नहीं समझा।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या "सर्जिकल स्ट्राइक डे" का आयोजन 2019 लोक सभा चुनाव को देखते हुए किया जा रहा है ? यह महज खानापूर्ति है या वास्तव में शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि ?


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