आजमगढ़ : हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर मुन्शी प्रेम चन्द्र ने बुराइयों को दूर करने के लिए लेखनी को बनाया अस्त्र - त्रिलोकी नाथ पाण्डेय
आजमगढ़ : हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर मुन्शी प्रेम चन्द्र ने बुराइयों को दूर करने के लिए लेखनी को बनाया अस्त्र - त्रिलोकी नाथ पाण्डेय
आजमगढ़ ब्यूरो।सिद्धेश्वर पाण्डेय
तहलका 24x7
जनहितकारी सेवा संस्थान अम्बारी के तत्वाधान में नेशनल कान्वेंट स्कूल भेड़िया में महान उपन्यासकार मुन्शी प्रेमचन्द की जयन्ती मनायी गयी। इस दौरान वक्ताओं ने उनके जीवन चरित्र एवं उनके कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
संस्था अध्यक्ष त्रिलोकी नाथ पाण्डेय ने सम्बोधित करते हुए कहा कि उपन्यास सम्राट मुन्शी प्रेमचन्द ने अपनी समाज मे व्याप्त बुराइयों को दूर करने लिए अपनी लेखनी को ही अस्त्र बना लिया था। उनकी प्रमुख उपन्यास गोदान, कर्मभूमि, सेवा सदन व रंगभूमि आदि की कृतियों से प्रभावित होकर बंगाल के बिख्यात उपन्यासकार शरद चन्द्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रमुख समाज सेवी महफूज आज़मी ने कहा मुंशी प्रेमचन्द्र जी हिंदी और उर्दू के महानतम लेखकों के से एक थे। प्रेमचन्द जी को नबाब रॉय और मुन्शी प्रेमचन्द्र के नाम से भी जाना जाता है। सचिव सिध्देश्वर पाण्डेय ने कहा कि मुन्शी जी की सम्वेदनशील लेखनी हिन्दी साहित्य की एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी के विकास का अध्यन अधूरा होगा।
इस अवसर पर माला मिश्रा, अशोक यादव, कमलेश पाण्डेय, पंकज, रेखा तिवारी, लोकेश, चन्द्रभान यादव, कृष्णमोहन मिश्रा आदि लोग रहे। संचालन सिद्धेश्वर पाण्डेय ने किया। प्रबन्धक सन्तोष कुमार ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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