सुल्तानपुर : शिव महापुराण कथा में पार्थिव शिवलिंग की सुनाई कथा

सुल्तानपुर : शिव महापुराण कथा में पार्थिव शिवलिंग की सुनाई कथा


प्राचीन वीर शैव तंत्र साधना सिद्धपीठ पंचमुखेश्वर महादेव मंदिर भवानीपुर सूरापुर प्रांगण में शिव महापुराण कथा का रसपान

सुरापुर।
शीलेश बरनवाल
तहलका 24x7
               पवित्र सावन माह के प्रथम दिन शनिवार को प्रचीन वीर शैव तंत्र साधना सिद्ध पीठ पंचमुखेश्वर महादेव मंदिर भवानीपुर के प्रांगण में शिव महा पुराण कथा के प्रथम दिन पार्थिव शिवलिंग के निर्माण तथा उसके पूजन विधि की विषद व्याख्या, शिव लिंग में प्राण प्रतिष्ठा के साथ नारद मोह का वर्णन किया गया। शिव भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए श्री देव संकठा प्रसाद सिंह जी ने योग तथा योगी के वर्णन के साथ योग से मुक्ति का विधान बताया, स्वर्ग प्राप्ति तथा मुक्ति में अंतर स्पष्ट करते हुए शिव भक्ति से मुक्ति प्राप्ति का ढंग बताया।
श्री देव जी ने भक्ति व ज्ञान में अंतर बताते हुए दोनों की श्रेष्ठता बताई। कथा के दूसरे दिन नारद मोह कथा का वर्णन कराते हुए कहा कि देवर्षि नारद जी की तपस्या से व्याकुल इंद्र अपनी अप्सराओं के साथ कामदेव को नारद को विचलित करने के लिए भेजा और सफलता नहीं मिली। यहीं नारद जी को अहंकार हो जाता है। उनके अहंकार को तोड़ने के लिए भगवान विष्णु एक नगर का निर्माण करके वहां के राजा शीलनिधि के यहां उनकी पुत्री का स्वयंवर कराते हैं। विचरण करते हुए नारद जी वहां पहुंचते हैं। लड़की का हाथ देख कर ज्ञात हुआ कि इसको वरण करने वाला तीन लोक का स्वामी होगा। वहां से निकल कर नारद भगवान विष्णु को याद करते हुए उनके स्वरूप की कामना की। विष्णु जी उन्हें बंदर का रूप दे देते हैं। और वह स्वयंवर में हंसी का पात्र बन जाते हैं। वहीं विष्णु जी को श्राप देते हैं और कहते हैं कि यही स्वरूप एक दिन आपकी मदद करेगा।

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