जौनपुर : तहलका 24x7 न्यूज़ एक्सक्लूसिव ! धड़ल्ले से चल रहे मानक विहीन विद्यालय, मूक बधिर प्रशासन ने रेवड़ी की तर्ज पर बांट दी है मान्यता

जौनपुर : तहलका 24x7 न्यूज़ एक्सक्लूसिव ! धड़ल्ले से चल रहे मानक विहीन विद्यालय, मूक बधिर प्रशासन ने रेवड़ी की तर्ज पर बांट दी है मान्यता


भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से शाहगंज कस्बे में खूब फल फूल रहा है शिक्षा का कारोबार


नौनिहालों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़, प्रशासन की मौन स्वीकृति


कहीं महज दो फीट चौड़ा है रास्ता तो कहीं सूर्य की रोशनी ही नहीं पहुंचती

शाहगंज।
रविशंकर वर्मा
तहलका 24x7
                                       शिराज़ - ए - हिन्द की ज़मीं पर कुकुरमुत्ते की भांति उगे मानक विहीन विद्यालय अवैध कमाई के अड्डे बन गए हैं। स्कूल संचालक सारे नियम कानून ताक पर रख नौनिहालों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। शिक्षा विभाग और प्रशासन भी मूक बधिर की भांति मुर्गी के दरबे जैसे घरों में स्कूल संचालित करने की मान्यता रेवड़ी की तर्ज पर बांट दी है। सिर्फ नगर में ही ऐसे दर्जन भर स्कूल चल रहे हैं जो मानकों को रत्ती भर भी पूरा नहीं करते लेकिन सब कुछ जानते हुए भी शिक्षा विभाग अजीब सी चुप्पी ओढ़े हुए है।
"तहलका 24x7 न्यूज़" की पड़ताल के बाद मिली जानकारी के मुताबिक शाहगंज क्षेत्र में तकरीबन डेढ़ दर्जन से ज्यादा विद्यालय बिना मानक पूरा किये ही मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। अजीब बात यह है कि शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते ऐसे घरों में विद्यालय चलाने की मान्यता दे दी गई है जहाँ बच्चों के आने जाने के रास्ते की चौड़ाई बमुश्किल डेढ़ से दो फीट ही है। अंदाजा लगाना ज्यादा मुश्किल नहीं है कि अगर कोई अनहोनी हुई तो बच्चे आखिर स्कूल से बाहर कैसे निकल पाएंगे ? अगर सिर्फ नगर क्षेत्र की बात की जाय तो...

#  पक्का पोखरा स्थित दो इंग्लिश मीडियम विद्यालय

#  एराकियाना मोहल्ले में एक विद्यालय

#  पश्चिमी कौड़िया में मेनरोड पर स्थित एक विद्यालय

#  भादी में पल्थी रोड तिराहे (हुब्बीगंज मोड़ पर) पर एक विद्यालय

#  पुरानी बाजार मोहल्ले में दो विद्यालय

#  सुल्तानपर रोड (बरदहिया) में दो विद्यालय

#  पक्खनपुर मोड़ के करीब दो विद्यालय

#  सेंट थॉमस रोड (दादर बाईपास) पर स्थित एक विद्यालय

मानकों के पैमाने पर बुरी तरह फेल होते हैं। कस्बे में पल्थी मोड़, पुरानी बाजार और पश्चिमी कौड़ियां में मेनरोड पर स्थित विद्यालयों का हाल तो बेहद बुरा है जहां कक्षाओं में सूर्य का प्रकाश तक नहीं पहुंचता। यहां बिजली कट जाने पर छात्र एक दूसरे को देख तक नहीं पाते। ये विद्यालय आवासीय परिसर में धड़ल्ले से चल रहे हैं और निगरानी करने वाला तंत्र नदारद है।
   
बताते चलें कि वर्ष 2016 में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने जनपद समेत पूरे प्रदेश में मानक एवं मान्यता विहीन विद्यालयों के संबंध में जनहित याचिका दायर की थी। कोर्ट ने इसे संज्ञान में लेते हुए जनपद सहित प्रदेश के सम्बंधित अधिकारियों को मानक विहीन व फर्जी मान्यता वाले स्कूलों और उनके प्रबंधकों पर कार्रवाई के लिए आदेशित किया था। आदेश के बाद मची खलबली के दौरान जनपद के भी कई स्कूलों को अधिकारियों ने बंद करवा दिया था लेकिन कुछ ही समय बाद ये सब विद्यालय पुनः खुल गए और बेख़ौफ़ होकर नौनिहालों के भविष्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं।

# मान्यता के लिए क्या हैं मानक


नर्सरी से कक्षा 8 तक के स्कूल की मान्यता लेने के लिए शिक्षा का अधिकार नियमावली 2011 नई मान्यता नीति के मुताबिक स्कूल भवन नेशनल बिल्डिंग कोड के अनुसार होने चाहिए। स्कूल के शिक्षकों और कर्मियों को अग्निशमन उपकरणों का प्रशिक्षण प्राप्त होना चाहिए और अग्निशमन उपकरण विद्यालय में लगे होने चाहिए। इसके अलावा हिंदी मीडियम की मान्यता लेने वाले प्राथमिक स्कूलों के लिए पांच कक्षाएं और उच्च प्राथमिक स्कूल के लिए तीन अतिरिक्त कक्षाएं होना जरूरी हैं। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल में प्रति छात्र 9 फीट तथा कक्षा का पूरा क्षेत्रफल 180 वर्ग फीट से कम नहीं होना चाहिए। प्रत्येक कक्षा में 20 बच्चों के बैठने की व्यवस्था होनी चाहिए। प्रधानाध्यापक व स्टाफ के लिए अलग कमरा होना चाहिए। प्री-प्राइमरी से प्राइमरी तक के लिए 200 बच्चों पर 7 कक्षाएं, प्राइमरी के लिए 150 बच्चों पर 5 कक्षाएं, प्री-प्राइमरी से जूनियर हाईस्कूल तक के लिए 275 बच्चों पर 10 कक्षाएं तथा प्राइमरी से जूनियर हाईस्कूल के लिए 225 बच्चों पर 8 कक्षाएं होनी चाहिए। सभी मानक और शर्तों को पूरा करने वाले नर्सरी, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों का रंग सफेद होना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि मान्यता लेने वाले स्कूलों में खेल का मैदान होना जरूरी है लेकिन नगर में जितने भी मान्यता प्राप्त विद्यालय है, उनके पास खेल का मैदान व अन्य सुविधाएं नहीं हैं। मान्यता के लिए छात्र -छात्राओं तथा शिक्षक -शिक्षिकाओं के लिए अलग -अलग मूत्रालय व शौचालय होने चाहिए। स्कूल में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था होनी चाहिए। इतने मानक पूरा होने पर ही मान्यता मिलना चाहिए लेकिन वर्ष 2012 में तैनात एक अधिकारी ने रूपये खर्च कर मान्यता लेने वाले संचालकों को बेख़ौफ़ हो रेवड़ी की तर्ज पर मान्यता दे दिया। यहां तक कि 13 से 30 फीट चौड़े आवासीय मकान में भी स्कूल चलने की मान्यता भी दे दी गई।
   

# मानक विहीन विद्यालयों में भी आवासीय विद्युत कनेक्शन


बिजली विभाग भी इन आवासीय भवनों में मान्यता लेकर स्कूल चलाने वाले संचालकों पर मेहरबान है। ऐसे विद्यालयों में व्यावसायिक बिजली कनेक्शन होना चाहिए लेकिन अधिकांश विद्यालय आवासीय कनेक्शन के द्वारा बिजली प्राप्त कर रहे हैं। जिससे सरकार को हर महीने लाखों का चूना लग रहा है ।

# अभिभावक जागरूकता के अभाव में अनभिज्ञ


छात्रों के माता पिता अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए काफी परेशान रहते हैं और इन मानकविहीन स्कूलों के चक्कर में पड़ जाते हैं । जागरुकता की कमी के चलते अभिभावकों को नियमों और मानकों की जानकारी नहीं होती और स्कूल संचालक इसी का गलत फायदा उठाते हैं ।

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