जौनपुर : तहलका 24x7 न्यूज़ एक्सक्लूसिव ! स्थानीय रेलवे जंक्शन पर गजब का गड़बड़ झाला
गड़बड़ झाला की तफ्तीश में आयी दिल्ली से एक स्पेशल जांच टीम, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का किया सघन परीक्षण
विकास के नाम पर गत साढ़े तीन वर्षों में 5 करोड़ 28 लाख 50 हजार रुपये हुआ खर्च फिर भी न बदली स्टेशन की सूरत व सीरत
गज़ब ! "63 लाख" का ट्यूबेल लगा फिर भी स्टेशन समेत आरपीएफ बैरक में पानी का अकाल
कागज़ोंं में प्लेटफार्मों पर लगी हैं 20 लाख के लागत की दो सौ सीट की स्टील कुर्सियां जो कागजों की खुराक बनीं
रवि शंकर वर्मा व फूल कुमार प्रजापति की स्पेशल रिपोर्ट
![]() |
| दिल्ली से आयी एक स्पेशल जांच टीम |
स्पेशल डेस्क
तहलका 24x7
उत्तर रेलवे का फैजाबाद जफराबाद रेल प्रखंड पर स्थित शाहगंज जंक्शन चार जनपदों का केंद्र बिंदु है। क्षेत्र के आस पास के जनपदों सेे यात्री स्टेशन पर पहुंच देश के अलग - अलग स्थानों के लिए जाते हैं। परंतु यहाँ यात्री सुविधाओं का टोटा लगा हुआ है यात्री सुविधा के नाम पर सिर्फ कागजों पर करोड़ों रुपये का विकास कार्य हुआ है मौके पर स्टेशन की स्थिति बद से बदतर है। इन दिनों बरसात के दिनों में स्टेशन पर यात्रियों को भीगने से बच पाना मुश्किल है इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से विकास कार्य किया गया है ? जबकि इस रेल प्रखंड का वाराणसी के बाद सबसे ज्यादा आमदनी वाला स्टेशन है। इसका अनदेखी लोगों के गले से नीचे नही उतर रहा है।
"तहलका 24x7 न्यूज़" को प्राप्त दस्तावेजों के मुताबिक विगत साढ़े तीन वर्षों के बीच उत्तर रेलवे द्वारा शाहगंज स्टेशन पर यात्री सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए 5 करोड़ 28 लाख 50 हजार रुपये की धन स्वीकृत हुई थी। जिसमें वर्ष 2015 - 2016 में ही 2 करोड़ 14 लाख 50 हजार के कार्य पहले ही पूर्ण कर लिए गए है जिसमे पी एस आर बिल्डिंग के लिए 10 केवी का सौर ऊर्जा संयंत्र जो बारह लाख का लगना था, प्लेटफॉर्म नंबर 1, 2 व 3 पर शेड के विस्तार के लिए 95 लाख मिले कार्य भी पूरा हुआ लेकिन बरसात में स्टेशन के समस्त यात्री भीगने को मजबूर है प्लेटफॉर्म 2, 3 व 4 की फर्श की सुधारीकरण के लिए 16 लाख 75 हजार खर्च हुए पर फर्श आज भी टूटे फूटे जस के तस नजर आ रहे है। स्टेशन परिसर में जलापूर्ति वृद्धि के लिए 63 लाख का ट्यूवेल लगा पर इसके भवन व मोटर खरीद फरोख्त में बड़े गोलमाल के संकेत भी मिले है। प्लेटफॉर्म संख्या 2 व 3 पर वाटर कूलर 3 लाख की लागत से लगा किंतु मौके पर वह अधूरे व खराब पड़ेे हैं।स्टेशन परिसर के विद्युतीकरण के लिए ढ़ाई लाख खर्च किये गए फिर भी परिसर में समुचित प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। ड्राइवर गार्ड के अतिरिक्त रूम के लिए 21 लाख मिले उसमे घटिया मैटेरियल का प्रयोग कर सिर्फ खानापूर्ति ही प्रकाश में आया।
उत्तर रेलवे के अधिकारियों के अनुसार शाहगंज स्टेशन पर कुल 2 करोड़ 14 लाख 50 हजार पहले ही खर्च कर स्टेशन पर अलग - अलग निर्माण कार्य कराया जा चुका है लेकिन मौके यात्री सुविधाएं नदारद है।
![]() |
| दिल्ली से आयी एक स्पेशल जांच टीम |
पे एंड यूज्ड शौचालय के लिए 8 लाख स्वीकृत हुए पर आरोप है कि उसमे सभी घटिया सामाग्री का इस्तेमाल किया गया है जिसमें घटिया सीमेंट व ईट का प्रयोग बेहिसाब किया गया है। खैर वह बन कर तैयार है। प्लेटफॉर्म संख्या 4 पर नया वॉशेबल अप्रम्म का निर्माण 1 लाख 85 हजार का होना है परंतु इसका निर्माण अभी अधर में है । प्लेटफार्मों पर तीन वेंडिंग मशीन जिसकी कीमत 30 लाख है वह सिर्फ स्टेशन पर शो पीस बना है।
अगर स्थानीय स्टेशन पर गौर किया जाय तो यात्री सुविधाएं नदारद है। यात्री सुविधाओं के नाम पर अधिकारी, इंजीनियर, ठेकेदार सब बंदरबाट किये है लोगों का कहना है कि इसकी जांच करायी जाय तो स्टेशन कार्यो में हुए बन्दरबाट से पर्दा उठ सकता है वही आरटीआई एक्टिविस्ट प्रशांत अग्रहरि द्वारा रेलवे अधिकारियों से शाहगंज स्टेशन पर खर्च रुपयों का व समस्त मैटेरियल का विभिन्न बिंदुओं पर सूचना माँगा गया था परंतु निर्धारित अवधि तक अधिकारियों ने सूचना नहीं दिया
# क्या बोले आरटीआई एक्टिविस्ट प्रशांत अग्रहरि
इस सम्बन्ध में थाना अपराध निरोधक कमेटी के अध्यक्ष व आरटीआई एक्टिविस्ट प्रशान्त अग्रहरि ने "तहलका 24x7 न्यूज़" से ख़ास बातचीत में बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना बहुत कठिन कार्य है रेलवे में व्याप्त खामियों के बाबत कई बार मेरे द्वारा रेल मंत्रालय को पत्र भेजा गया है क्योंकि अंग्रेजों के जमाने से आज तक स्टेशन पर कुछ ख़ास परिवर्तन नही दिख रहे है लेकिन स्टेशन के विकास कार्यों के लिए सरकारी धन की गंगा बह रही है वर्ष 2015 से फरवरी 2018 तक स्टेशन के विकास कार्यों के लिए 5 करोड़ 28 लाख 50 हजार स्वीकृत हुए परंतु स्टेशन की सूरत व सीरत नहीं बदली। जिसे लेकर मेरे द्वारा 19 अगस्त 2017 को रेलवे द्वारा कराए गए कार्यों से सम्बंधित जनहित में कुल 6 बिंदुओं पर डीआरएम (उत्तर रेलवे) से सूचनाएं मांगी गयी थी परंतु निर्धारित समय तक सूचना नही दी गयी पुनः 4 अक्टूबर 2017 को प्रथम अपील एस. डी .जी .एम बड़ौदा हाउस से की गयी फिर भी सूचनाएं नही उपलब्ध करायी गई। जिसके बाद दिनांक 6 नवम्बर 2017 को द्वितीय अपील मुख्य सूचना आयुक्त केंद्रीय सूचना आयोग नई दिल्ली से की गयी जो अभी लंबित है हैरत की बात है यह है कि जनहित के मामलों में प्रशान्त अग्रहरि को न ही सूचनाएं उपलब्ध करायी गयी और न ही उन्हें केंद्रीय सूचना आयोग के तरफ से सुनवाई के लिए बुलाया गया इसके बाद सम्पूर्ण प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने के लिए प्रशान्त अग्रहरि के द्वारा माननीय प्रधानमंत्री, निदेशक सीबीआई व रेल मंत्री को एक पत्र भेजा गया कि रेलवे अधिकारियों द्वारा सूचना न देने की दशा में ऐसा प्रतीत होता है कि शाहगंज स्टेशन के निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार हुआ है। उनके इस पत्र के बाद रेल महकमा में खलबली मच गयी आनन - फानन में उल्टे रेलवे सतर्कता विभाग के गोपनीय प्रकोष्ठ से एक पत्र दिनांक 15 जून 2018 को प्रशान्त अग्रहरि के पास भेजा गया जिसमे जिक्र किया गया है कि भ्रष्टाचार से सम्बंधित कोई प्रमाण हो तो कार्यालय को उपलब्ध कराया जाय फ़िलहाल आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा रेलवे सतर्कता विभाग को जवाब प्रेषित कर दिया गया है ।
# गड़बड़ झाला की तफ्तीश में वृहस्पतिवार को पहुंची दिल्ली से एक जांच टीम
स्थानीय रेलवे स्टेशन पर व्याप्त खामियां व निर्माण कार्यों में घटिया निर्माण सामाग्री व अन्य कमियों की जांच हेतु दिल्ली के बड़ौदा हाउस एक स्पेशल जांच टीम पहुंची जहां विजलेंस टीम इंस्पेक्टर ने साइकिल स्टैंड की नाप करायी, मालगोदाम का जायजा लिया, यहाँ लगे शेड को अपर्याप्त बताया, पीडब्लूआई कार्यालय, सीनियर सेक्शन इंजीनियर रेल पथ के कार्यालय पहुंच वहाँ स्टॉक का मिलान किया तथा उन्होंने यह बताया कि प्लेटफार्मों के फर्शों में घटिया सामाग्री मिलाया गया है जिसकी रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
# जांच टीम के आने से मचा स्थानीय रेलवे स्टेशन पर हड़कंम्प
शाहगंज स्टेशन पर जांच टीम के पहुंचने के चलते लखनऊ से लेकर जौनपुर वाराणसी तक के अधिकारियों, ठेकेदारों, इंजीनियरों में हड़कंम्प मच गया है। वहीं लोगों का कहना है कि अगर जांच टीम निष्पक्ष रूप से रिपोर्ट को रेल मंत्रालय को सौंपता है तो कई अधिकारियों ठेकेदारों की गर्दनें नप सकती है।


Comments
Post a Comment