नई दिल्ली : तहलका 24x7 विशेष ! तेल में "आग" लगा कौन रहा ?
नई दिल्ली।स्पेशल डेस्क
तहलका 24x7
तब सरदार की सरकार थी । एक अप्रैल 2014 की बात है। एक लीटर पेट्रोल के पीछे सरकार 9.48 रुपये और डीजल पर 3.56 रुपये एक्साइज ड्यूटी वसूलती थी। फिर 26 मई 2014 में मोदी जी की सरकार बनी। खजाना भरने की मजबूरी कहें या फिर हर जगह के नुकसान को एक ही जगह से भरने की हड़बड़ाहट। एक्साइज ड्यूटी को मानो घोड़ा बना दिया। कह दिया- उछलो बेटा, जितना उछलना चाहो। सिर्फ दो साल के भीतर मोदी सरकार ने 126 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी। नौ रुपये 48 पैसे से बढ़कर टैक्स 21.48 रुपये हो गया। मई 2014 से मार्च 2016 तक चार बार डीजल पर भी एक्साइज ड्यूटी बढ़ी। अब डीजल पर 3.56 से कहीं छह गुना ज्यादा 17.33 रुपये एक्साइज ड्यूटी वसूला जाने लगा। हालांकि सितंबर 2017 में सिर्फ एक बार सरकार ने दो रुपये एक्साइड ड्यूटी घटाई थी। जिससे अब पेट्रोल पर 19.48 रुपये एक्साइज ड्यूटी है।
ध्यान दीजिए, यह सिर्फ केंद्र सरकार के स्तर से थोपे सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी की बात हो रही। बाकी राज्यों स्टेट वैट और सेल्स टैक्स अलग से वसूल ही रहे हैं। अब सरकार की कमाई की बात करें तो इस दौरान करीब डेढ़ सौ फीसद सरकार ने कमाई की। खुद पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 2017 में लोकसभा को बता चुके कि सरकार ने 2014-15 में सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी से 99.184 करोड़, स्टेट वैट और सेल्स टैक्स से 137.157 करोड़, 2015-16 में 178.591 और 142.848 और 2016-17 में 242.691 और 166.378 करोड़ रुपये कमाए।
बेहिसाब टैक्स के चलते ही हम-आप 37.19 रुपये के पेट्रोल को आप 76.57 रुपये में खरीदने को मजबूर हैं। बेस प्राइस के अलावा 3.62 रुपये डीलर कमीशन, 19.48 रुपये सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, 16.28 रुपये स्टेट वैट अदा करना पड़ रहा।
वर्तमान समय की राजनीति असल मुद्दों से फिसल कर निचले पायदान पर पहुंच गई है। मजहब, जाति, गाय, कब्रिस्तान जैसे मुद्दों में जनता को उलझा कर रखा जा रहा है। आखिरकार विचार तो करना ही होगा लेकिन कब ?
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