जौनपुर : स्टेशन के विकास कार्यों की उच्चस्तरीय जांच हो तो नप सकते है रेलवे के बड़े मगरमच्छ
कागज़ पर लगी हुई है प्लेटफार्म पर 200 स्टील की कुर्सियां, सभी 200 कुर्सियां कागज़ो की खुराक बनी
भीषण गर्मी के मौसम में शाहगंज रेलवे स्टेशन पर पानी की एक एक बूंद के लिए तरस रहे है रेलयात्री
शाहगंज।फूल कुमार प्रजापति
तहलका 24x7
स्थानीय रेलवे स्टेशन उत्तर रेलवे का सबसे महत्वपूर्ण व कमाऊ जंक्शन है परंतु रेल अधिकारियों की उदासीनता के चलते यहाँ यात्री सुविधाओं का टोटा लगा है। भीषण गर्मी में रेल यात्री पानी के लिए तरसते है जबकि स्टेशन के विकास के लिए रेल मंत्रालय द्वारा दो जोन से यात्री सुविधाएं प्रदान की जाती है। अगर स्टेशन की विकास की बात की जाए तो स्थानीय स्टेशन के विकास में करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है सबसे खास बात है कि यहां कागजों पर यात्रियों से सम्बंधित सारी सुविधाएं हैं लेकिन जमीनी हकीकत पर कुछ भी नहीं देखने को मिलता है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक स्टेशन के प्लेटफार्म पर 200 स्टील की कुर्सियां भी कागज़ पर लगी हुई है जबकि मौके पर एक भी नहीं है। सभी 200 कुर्सियां कागज़ो की खुराक बन गये हैं। इन दिनों भीषण गर्मी है आसमान से आग बरस रहा है ऐसे में टिकट घर के पास यात्री खुले में बैठने को मजबूर है क्योंकि टिकट घर के ऊपर लगे टीनशेड को मरम्मत के नाम पर कई माह पहले ही उजाड़ दिया गया है जो अभी तक बन नहीं सका। गौर करने वाली बात है इस रेलवे स्टेशन पर आए दिन डीआरएम द्वारा निरीक्षण भी किया जाता है फिर भी खामियां जस की तस बनी हुई है। पूर्वोत्तर व उत्तर रेलवे की आपस की खींचातानी के चलते स्टेशन का विकास अधर में लटक जाता है।
स्थानीय रेलवे स्टेशन पर समुचित जलापूर्ति, यात्रियों की बैठने की सुविधा, साफ-सफाई की व्यवस्था आदि के न होने से आये दिन यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। परिसर में दो वाटर कूलर लगे हैं पर उसमें गर्म पानी ही मिलता है। प्लेटफॉर्म नंबर चार के बीच बने शौचालय में भी मानक के विपरीत सामग्री के प्रयोग से अभी से ही टंकियां उखड़ने लगी है। इन दिनों स्थानीय स्टेशन पर विद्युतीकरण कार्य हो रहा है मजदूर गड्ढा खोद छोड़ दिए हैं जिससे यात्री गड्ढे में गिरकर घायल हो रहे है। प्लेटफार्म नंबर चार की रेलवे लाइन जिसे पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा दोहरीकरण किया जाना है जिसकी धीमी गति के चलते आए दिन ट्रेनें लेट हो रही हैं।
# भीषण गर्मी में पानी की एक एक बूंद को तरसते है यात्री, पानी को लेकर होता है खेल, नहीं बिकता रेल नीर
स्टेशन परिसर में लगे पानी की टोटियों में पानी न आना आम बात हो गयी है ऐसे में प्रचंड तपिश के दिनों में लोग पानी के लिए तरसते हैं। वहीं प्लेटफार्मों पर लगे हैण्डपम्प खराब पड़े हुए हैं। रेल सूत्रों के मुताबिक स्थानीय रेलवे स्टेशन पर बंद बोतल बेचने के लिए अवैध वेंडरों व कैंटीन संचालकों द्वारा स्टेशन परिसर में लगे पानी की टोटियों को तोड़ दिया जाता है उसकी पाइप में लकड़ी आदि डाल देते है जिससे लोग पानी न ले पाये हैण्डपम्प खराब होने पर उसे भी बनवाने में हीलाहवाली की जाती है ऐसे में थक हार कर रेलयात्री 20 रुपये की बंद बोतल पानी मजबूर होकर खरीदता है। रेल में पानीे का खेल इतना दिलचस्प है कि रेल अधिकारी भी खामोश रहते है जबकि स्टेशन व ट्रेनों में रेल नीर ही निर्धारित मूल्य में बेचने का प्राविधान है


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