विश्व में रामचरित मानस जैसा कोई महान ग्रन्थ नहीं - मदनमोहन मिश्र

#  विश्व में रामचरित मानस जैसा कोई महान ग्रन्थ नहीं - मदनमोहन मिश्र 

#  मलिकपुर नोनरा (कादीपुर) मेँ रामकथा का दूसरा दिन

सूरापुर/ सुल्तानपुर 
शीलेश बरनवाल 
तहलका 24 x 7 
                   रामचरित मानस समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की प्रेरणा देता है। पूरे विश्व में रामचरित मानस जैसा कोई महान ग्रन्थ नही है। उक्त बातें वाराणसी के प्रसिद्ध कथावाचक डाक्टर मदनमोहन मिश्र ने मलिकपुर नोनरा (कादीपुर) में महादेव मन्दिर मेँ कही। मानस कोविद से विभूषित डाक्टर मिश्र ने रामकथा के दूसरे दिन राम के आदर्शों की प्रशंसा करते हुए कहा कि भगवान राम ने मर्यादा का पालन कर समस्त संसार को त्याग के अनुसरण की सीख दी।  रामकथा मे दूसरे दिन श्रोताओं को धनुष तोडऩे पर भगवान परशुराम के क्रोध का वर्णन करते हुए श्री मिश्र ने कहा कि अपने आराध्य महादेव के धनुष टूटने पर परशुराम जी अपने ही अवतार राम तथा लक्ष्मण को ललकारने लगे। भगवान राम द्वारा जब वास्तविकता का बोध परशुरामजी को हुआ तो वह अपने धाम को चले गए। रामकथा का सँचालन राधेकृष्ण द्विवेदी ने किया। व्यासपीठ का श्रीनेत्र तिवारी, रामशिरोमणि साव ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।  इस अवसर पर अमरीश मिश्र, रूद्रप्रताप दूबे, बद्रीसिंह, भोला यादव, रविकांत दूबे, उपेंद्र जी आदि मौजूद रहे। रामकथा मे अरूण प्रकाश श्रीवास्तव ने भजन प्रस्तुत किया।

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