गऊ सेवा यज्ञ के समान व गृहस्थी सबसे पवित्र - वेदनिधि शास्त्री

# गऊ सेवा यज्ञ के समान व गृहस्थी सबसे पवित्र - वेदनिधि शास्त्री

#  रामसूरति पाँडे के सँयोजकत्व मे कथा के छठे दिन श्रीमद्भागवत कथा मे जुटी भीड


करौदी कला( सुल्तानपुर )
अमरीश मिश्रा
तहलका 24 x 7

भारतीय संस्कृति में गृहस्थ सम्पूर्ण आश्रम है। गाय सेवा एक यज्ञ है, भगवान कृष्ण ने गाय सेवा कर सम्पूर्ण जगत को गाय की महत्ता बताई है। कृष्ण और बलराम ने गाय चराकर खेल-खेल मेँ आसुरी शक्तियों का नाश किया। यह बातें सलारपुर शिवहरषनगर में श्रीमद्भागवत कथा कहते हुए व्यासपीठ से वेदनिधि शास्त्री ने कही।  कँस वध की कथा का श्रवण कराते हुए मुम्बई से पधारे कथावाचक श्री शास्त्री ने कहा कि अन्याय करने वाला कभी सफल नही होता, यही कारण है कि कँस के सारे छल प्रपंच काम नही आये और भगवान कृष्ण ने कँस को मार दिया। व्यासपीठ से श्री शास्त्री ने कहा कि आज हमारे देश में सँस्कार, सँस्कृति व सँस्कार की उपेक्षा हो रही है जिससे युवा दिग्भ्रमित हो रहा है। श्री शास्त्री ने इस अवसर पर श्रोताओं को कृष्ण की शिक्षण का वर्णन करते हुए कहा कि गुरूकुल मे श्री कृष्ण ने 64 दिन मे 64कलाओ का ज्ञान प्राप्त किया।  व्यासपीठ ने इस अवसर पर भारत की प्राचीन शिक्षण संस्थानों का विस्तार से वर्णन किया। व्यासपीठ की आरती काँग्रेस नेता प्रमोद मिश्र, रामनाथ पाँडे, राम अजोर मिश्र ने किया। इस अवसर पर वँशबहादुर सिह, विनोद तिवारी, राहुल पाँडे, राजेंद्र सिह, आनंद पाँडे, अरविंद पाँडे, विजय उपाध्याय आदि मौजूद रहे। आयोजक पँडित रामसूरति पाँडे ने सबका आभार व्यक्त किया। कथा का समापन वृहस्पतिवार को होगा।

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