# सत्संग ही है ईश्वरीय अनुकम्पा का सटीक मार्ग : वेदनिधि शास्त्री
करौदी कला (सुल्तानपुर)
अमरीश मिश्र
तहलका 24 x 7
आज की आधुनिकता भरी दौड़ मे संवेदना खत्म होती जा रही है, रिश्ते खत्म होते जा रहे हैं क्योंकि मनुष्य बनावटी होता जा रहा है। भगवान कृष्ण ने आत्मिक प्रेम कर यशोदा व नन्दधाम को पवित्र कर दिया। यह बातें सलारपुर रवनिया में हो रही श्रीमद् भागवत कथा में व्यास पीठ से मुम्बई से पधारे वेदनिधि शास्त्री ने कही। श्री शास्त्री ने कहा कि जीवन की सार्थकता भगवत प्रेम मे है। उन्होंने कहा कि ईश्वर की प्राप्ति का सबसे सरल उपाय सत्संग है। सत्संग व भक्ति सर्वश्रेष्ठ है। उन्होंने युवाओ को नशा व प्रदर्शन से मुक्त रहने की सीख दिया व दहेज के खात्मे का संकल्प दिलाया। व्यास पीठ से कृष्ण की लीला का रसपान कराते हुए कहा कि भगवान कृष्ण ने प्रकृति का संरक्षण कर इनका महत्व बताये । वर्तमान राजनैतिक परिवेश पर व्यंग्य करते हुए कहा कि आज भले ही गाय और गंगा का भला कम और राजनीति ज्यादा हो रही हो किंतु भगवान कृष्ण ने द्वापर मे गाय चराकर व यमुना को प्रदूषण रूपी कालिनाग से मुक्त कराया था। इस अवसर पर राम अजोर मिश्र, महेंद्र नाथ मिश्र, अरविंद पाँडे, आशीष कुमार, वाली भव आदि मौजूद रहे। आयोजक रामसूरति पाँडे ने सबका आभार व्यक्त किया। कथा दोपहर दो बजे से पाँच बजे तक होगी तथा समापन 30 नवम्बर को होगा।

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