माता सीता की खोज में अशोक वाटिका पहुंचे हनुमान
बालि-सुग्रीव युद्ध व सीताजी, रावण तथा हनुमान जी संवाद की दर्शकों ने की भूरि-भूरि प्रशंसा
सूरापुर (सुल्तानपुर)
शीलेश बरनवाल
तहलका 24 x 7
सूरापुर की ऐतिहासिक हनुमत रामलीला के तत्वावधान में आयोजित रामलीला मंचन के नवें दिन बालि वध - लंका दहन का जीवंत मंचन किया गया। लीला की शुरुआत सुग्रीव व बालि के युद्ध से हुई। ताड़ की आड़ से राम ने बालि का वध किया। बालि सुग्रीव युद्ध दर्शकों को रोमांचित कर दिया। लक्ष्मण ने सुग्रीव व अंगद का तिलक कर पम्पापुर का राजा व युवराज बनाया। महाराज सुग्रीव ने माता सीता का पता लगाने के लिए हनुमानजी, जामवंत, अंगद, नल-नील आदि को दक्षिण दिशा में भेजा। सौ योजन समुद्र लांघ कर हनुमान जी लंका पहुंचते हैं। जहां उनकी मुलाकात भक्त विभीषण से होती है। विभीषण के बताए स्थान अशोक वाटिका पहुंचे हनुमान जी की मुलाकात रावण - मंदोदरी आदि से होती है। सीताजी और रावण का संवाद देखकर हनुमान जी को बहुत दुख होता है।
सीताजी अशोक वृक्ष से खुद को जलाने के लिए आग मांगती हैं। मौका देखकर हनुमान जी ने राम की दी हुई अंगूठी सीताजी के पास गिरा देते हैं। अंगूठी देखकर सीताजी ने अंगूठी लाने वाले को सामने आने को कहती हैं। हनुमानजी सामने आकर राम की बातें बताते हैं और कहते हैं कि एक माह के भीतर आपको यहां से ले जाएंगे। मां से आज्ञा लेकर अशोक वाटिका का फल खाने पर रखवाली कर रहे राक्षसों से हनुमान जी का युद्ध के दौरान अक्षय कुमार मारा जाता है। मेघनाथ ने हनुमान जी को ब्रह्मास्त्र से बांध कर रावण के दरबार में पेश किया। जहां विभीषण की सलाह पर हनुमान जी की पूंछ में आग लगा दी गई। हनुमान जी ने आग लगी पूंछ से सोने की लंका जलाकर राख कर देते हैं।
रामलीला प्रबंधक सुरेश गुप्ता ने बताया कि हनुमान - भोला अग्रहरी, सुग्रीव- शिवम अग्रहरी, सीता- प्रांसू अग्रहरी, रावण- गोविंद सोनी, अंगद - मनोज मौर्य, राम- अनिल शर्मा ने जीवंत अभिनय किया। सोमवार को दशमी कर लमिया पर मेला लगाया जाएगा। रात्रि में भरत मिलाप कर *सत्यवादी हरिश्चंद्रनाटक का मंचन किया जाएगा।


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