# सरकारी अस्पताल में डॉक्टर हुए निरंकुश, ऑक्सीजन के नाम पर कर रहे वसूली

# सरकारी अस्पताल में डॉक्टर हुए निरंकुश, ऑक्सीजन के नाम पर कर रहे वसूली 

# नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का मामला, चिकित्सा अधीक्षक के कारखास ने ऐंठे हज़ारों रुपये 

# दलालों और चिकित्सकों की मिलीभगत से मरीज हलकान, दवा व जांच मोटे कमीशन वाले दुकानों पर


शाहगंज (जौनपुर) 
तहलका 24 x 7 
                  डॉक्टर को भगवान का रूप कहा जाता है लेकिन जब यही डॉक्टर शैतान बन जायें तो स्थिति भयावह हो जाती है। कुछ ऐसा ही हाल नगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र  का है। यहां चिकित्सा अधीक्षक की शह पर मरीजों से ऑक्सीजन के नाम पर हजारों रूपये ऐंठे जा रहे हैं। वसूली का काम चिकित्सा अधीक्षक के गुर्गे करते हैं। यहां तक कि मरीजों को दवा किस मेडिकल स्टोर से लेनी है और जांच कहां कराना है, ये भी गुर्गे ही तय करते हैं। कुल मिलाकर पुरुष चिकित्सालय में ज़िंदगी और मौत से जूझ रहे मरीजों से अवैध वसूली का धंधा ज़ोरों पर है। 
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक कोतवाली क्षेत्र के ताखा पश्चिम गांव निवासी राकेश कुमार की पत्नी गुड़िया (26) को चिकित्सा अधीक्षक डा. डीएस यादव ने भर्ती  किया। मरीज के तीमारदारों का आरोप है कि दो दिनों तक उनसे ऑक्सीजन के नाम प्रतिदिन 1000 रुपये लिये गये। पैसे का लेनदेन पिन्टू नामक व्यक्ति ने किया जो चिकित्सा अधीक्षक का कारखास है। उक्त व्यक्ति अस्पताल में किसी पद पर नहीं है। उसका स्थानीय चिकित्सालय से कोई सरोकार नहीं है। फिर भी चिकित्सा अधीक्षक की शह पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर जमा है। दूसरे दिन देर रात को मरीज की हालत बिगड़ी तो ऑक्सीजन उपलब्ध न होने का बहाना बनाया गया। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने जब मरीज को रेफर करने की बात कही तो तीमारदारों ने हंगामा मचा दिया और चिल्ला-चिल्लाकर अवैध वसूली का आरोप लगाने लगे। मौका देखकर चिकित्सा अधीक्षक का कारखास पिन्टू वहां से खिसक लिया। बाद में एमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ने मरीज को जिला चिकित्सालय के लिये रेफर कर दिया। अस्पताल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पिन्टू ही चिकित्सा अधीक्षक की शह पर तीमारदारों से अवैध वसूली का काम करता है। दवा कहां से लेनी है, जांच कहां होगी, तीमारदारों को इसकी जानकारी वही देता है। परेशान मरीज और तीमारदार कुछ कर नहीं पाते और हज़ारों रुपये बतौर कमीशन चुकाकर लुटा पिटा घर लौट जाते हैं। 


#  ऑक्सीजन होने के बावजूद बनाया बहाना

चिकित्सालय के सूत्रों की मानें तो वहां ऑक्सीजन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। बावजूद इसके चिकित्सा अधीक्षक के शह उनके गुर्गे द्वारा तीमारदारों अवैध वसूली की जाती है। जब गुड़िया की हालत बिगड़ने लगी तो पोल खुलने के डर से उसे जिला अस्पताल ले जाने का दबाव डाला जाने लगा। इसके लिये ऑक्सीजन खत्म होने का बहाना बनाया गया, जबकि मौके पर ऑक्सीजन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद था। जिस एम्बुलेंस से उक्त मरीज को जिला चिकित्सालय भेजा गया उस एम्बुलेंस में अलबत्ता आक्सीजन खत्म हो गया था। उसकी आपूर्ति स्थानीय चिकित्सालय से ही किया गया। 

#  दलालों के वर्चस्व से लुट रहे मरीज

सरकारी चिकित्सालय में आम तौर पर गरीब तबका इलाज कराने पहुंचता है। चूंकि वो निजी चिकित्सालयों का खर्च वहन नहीं कर सकते इसलिये सरकारी चिकित्सालय पहुंचते हैं। लेकिन यहां दलालों के चंगुल में फंसकर हज़ारों रुपये लुटा बैठते हैं। दलालों को चिकित्सकों का शह हासिल रहता है। मरीज की जांच उसी लैब में होगी, जहां दलाल चाहेंगे, दवा उसी मेडिकल स्टोर से खरीदनी होगी, जहां दलाल बतायेगा। साफ तौर पर लूट का खुल्ला खेल खेला जाता है और मरीज शिकायत तक नहीं कर पाता।

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