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# रामलीला समिति ने भाजपा विधायक का फूंका पुतला
# रामलीला समिति ने भाजपा विधायक का फूंका पुतला
# सोमवार की देर रात से अनवरत लुम्बनी दुद्धी राजमार्ग जाम
# प्रशासनिक अधिकारियों ने रामलीला समिति पर ही फोड़ा ठीकरा
# राम भक्तो पर लग रहा है राजनीति करने का आरोप
# आगामी निकाय चुनावों के मद्देनज़र प्रतिनिधि अपनी-अपनी राजनीति चमकाने में लगे हैं - एडीएम
# रामलीला समिति एवं जनता जनार्दन में जबरदस्त रोष
जौनपुर (शाहगंज)
रवि शंकर वर्मा
तहलका 24 x 7
राम के नाम पर राजनीति करने वाले विधायक ही जब रामलीला के कार्यों में अड़ंगा लगाने लगे तो रामभक्त कहने वाला हरेक व्यक्ति अपने आप को ठगा महसूस करने लगा है। मामला है शाहगंज रामलीला समिति का जिसमें रामलीला समिति के विपक्ष में स्वयं भाजपा विधायक ही खड़े नजर आ रहे हैं। रामलीला समिति की मांगो के बाबत रामलीला मैदान में अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए दीवार खड़ा करने के मामले में एक भाजपा विधायक रामलीला समिति के विपक्षी पक्ष की पैरवी कर दीवार न खड़ा करने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया है। इसी दोहरे चरित्र से क्षुब्ध रामलीला समिति के पदाधिकारियों एवं जनता जनार्दन ने उक्त भाजपा विधायक का पुतला फूंक विरोध प्रदर्शन किया। लोगों की जुबां पर है कि "जो राम का नहीं वो किसी काम का नहीं" प्रशासन भी मौके की नजाकत भांपते हुए सारा ठीकरा रामलीला समिति पर ही फोड़ दिया।
नगर के ऐतिहासिक रामलीला की 185 साल पुरानी परम्परा को अपनी अकड़ और ज़िद के चलते तोड़ देने वाले प्रशासन ने इसका ठीकरा समिति के नेतृत्वकर्ताओं पर फोड़ दिया है। जिलाधिकारी को सौंपे गये जवाब में एडीएम वित्त एवं राजस्व ने कहा है कि समिति के अध्यक्ष ने आगामी निकाय चुनावों के मद्देनज़र अपनी राजनीति चमकाने के लिये अडंगा लगाया। जिससे रामलीला निर्धारित तिथि से एक दिन बाद शुरू हुई। जवाब में एडीएम ने ये भी कहा है कि निर्धारित तिथि को रामलीला कराने की मुकम्मल तैयारी भी नहीं थी। प्रशासन के इस रवैये से समिति के पदाधिकारी क्षुब्ध हैं।

बता दें कि शाहगंज की ऐतिहासिक रामलीला बीते 185 सालों से अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी को शुरू होती रही है। निर्धारित तिथि को लीला शुरू कराने की तैयारी पूरी थी। तभी एक पुराना विवाद फिर से सामने खड़ा हो गया। रामलीला मैदान में अवैध अतिक्रमण करने वालों पर समिति ने मेले की तैयारियों को रोकने का आरोप लगाया। समिति ने जनपद दौरे पर आये उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को पत्रक देकर नगर के मुृख्य मार्ग की जर्जर सड़क बनवाने, बिजली आपूर्ति सही करने, अवैध अतिक्रमण स्थायी तौर पर हटवाने, मैदान में बाउंड्री वाल लगवाने और मौजूदा प्रशसनिक अधिकारियों को स्थानान्तरित करने की मांग रखी। इस संबंध में एडीएम और एएसपी के नेतृत्व में बातचीत भी हुई लेकिन बेनतीजा रही। इसी बैठक के दौरान एडीएम ने गलतबयानी कर दी और कहा कि रामलीला हो या न हो, उनसे मतलब नहीं है। लेकिन वो मैदान की बाउंड्री नहीं बनवायेंगे। इससे समिति के लोग भड़क गये और दुद्धी लुम्बिनी राजमार्ग पर चक्काजाम कर दिया। बाद में एक और वार्ता में दोनों पक्षों की सहमति बनी और प्रशासन ने 4 अक्टूबर तक दीवार बनवाने का वादा किया। उसके बाद जाकर निर्धारित तिथि से एक दिन बाद रामलीला शुरू हो सकी।
एडीएम की रिपोर्ट में सीधे सीधे मामले की पूरी ज़िम्मेदारी समिति के पदाधिकारियों पर मढ़ दी। बता दें कि आश्वासन के करीब हफ्ते भर बाद भी न तो सड़क ठीक कराई गई और ना ही बिजली आपूर्ति। जिसे लेकर जनता में प्रशासन के प्रति बेहद आक्रोश है।
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