!! मौत तो नाम से ही बदनाम है, वरना तकलीफ तो यादें ही देती हैं : लांस नायक पवन शर्मा
सूरापुर।शीलेश बरनवाल
तहलका 24 x 7
सरहद पर रात-दिन का अंतर न समझने वाले जवानों को रक्षा बन्धन पर्व पर बहनों को याद कर आंखे नम कर लेते हैं। बहनें भी सरहद पर दुश्मनों से देश की रक्षा में लगे भाइयों को इस पर्व में याद कर रो देती हैं। कादीपुर तहसील क्षेत्र के भपतिपुर गांव निवासी पवन शर्मा( 25) पुत्र सुरेश शर्मा वर्तमान में जम्मू- कश्मीर के अखनूर सेक्टर में आर्मी कोर सिग्नल में लांस नायक पद पर तैनात रक्षा बंधन पर्व को विशेष पर्व के रूप में मनाते हैं।
लांस नायक पवन शर्मा बताते हैं कि रक्षाबंधन पर्व पर हम सभी जवान साथियों को बहनों की दुआओं के रूप में भेजी गई राखियों का बेसब्री से इन्तजार रहता है। श्री शर्मा ने भावुक हो यादों को ताजा कर बताया कि ''मौत तो नाम से ही बदनाम है, वरना तकलीफ तो यादें ही देती हैं''।वर्ष 2015 में जबलपुर में ट्रेनिंग थी। मेरे साथी जवानों की राखियां मिल गई थी और मेरी नहीं मिली मुझे बहनों की यादें रूला रही थी। मै दिन भर रोता रहा पर्व के तीसरे दिन जब राखी मिली मन प्रसन्न हो गया साथियों ने कलाई पर राखी बांधकर सभी ने बारी-बारी मिठाई खिलाई। हम सभी जवान साथी बहनों की भेजी हुई दुआओं से परिपूर्ण राखियां एक-दूसरे के हाथों की कलाई में बांधकर टीका लगाते व लगवाते हैं फिर एक दूसरे को मिठाई खिलाते हैं।
सूरापुर क्षेत्र के शेखपुर गांव की प्रीती शर्मा पत्नी सत्य नारायन शर्मा रक्षा बंधन पर्व पर आर्मी में सरहद पर दुश्मनों से देश की रक्षा कर रहे भाई को याद कर भावुक हो जाती हैं। श्री मती शर्मा बताती हैं कि हर वर्ष पर्व से दस दिन पहले ही डाक से राखी भेज देती हूं। राखी मिलने की सूचना भाई से जब मिलती है तब मन प्रसन्न हो जाता है। उन्होंने बताया कि भाई के पर्स में पिछले साल की राखी पड़ी रहती है समय से न मिलने पर वही राखी भाई कलाई पर बांध लेता है।


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