!! कप्तान को रास नहीं आ रहें हैं ईमानदान छवि के थानेंदार


!! कप्तान को रास नहीं आ रहें हैं ईमानदान छवि के थानेंदार

!! जनता के बीच अच्छी छवि रखने वाले दरोगा या तो लाईन में या चार्ज से बाहर 

जौनपुर। 
मनोज उपाध्याय 
तहलका 24x7 
                     दरोगाओं के लिए कहा गया है, ''ऊपर कप्तान नीचे भगवान‘‘। यह कहावत सही भी है- यहां कप्तान द्वारा की गई दबादला, तैनाती चर्चा-ए-आम हैं। कप्तान को ईमानदारी से काम करने वाले थानेंदार रास नहीं आ रहें हैं। यही वजह है कि ईमानदार छवि वालें थानेदार तो लाईन में जा रहें हैं, या थानों पर सेकण्ड अफसरी कर रहें हैं। जुगाड़-तिकड़म और सत्ताधीशों को खुश रखकर भ्रष्ट और नकारा थानेंदार थानों का चार्ज पाये हुए हैं, जिनकी कार्यशैली आम-जन-मानस में अच्छी नहीं है। ऐसे थानेंदार राजनैतिक तैनाती के बल पर अपने आका को ही अपना कप्तान मानतें हैं, भले ही उनके थाना क्षेत्रों में अपराध चरम पर हो, उनका कभी बाल-बांका नहीं होता। 
                                                                                      वैसे वर्तमान कप्तान के कार्यकाल में अपराध होने पर दण्ड होने का नजरिया बदल गया है, भ्रष्ट और नकारा थानेंदार थानों पर चैन की बंशी बजा रहें हैं, भले ही उनके यहां अपराध चरम पर हो। जनता में ईमानदार छवि रखने वाले  दरोगा हटा दिये जा रहें हैं। बक्षा, खुटहन, शाहगंज, नेवढ़िया, चन्दवक आदि कई थानों के थानेंदारों की कार्यशैली आम जनता से छिपी नहीं है। यहां अपराध चरम पर है, थानों को थानेंदार दलालों का अड्ड़ा बना लिए हैं। बिना बिचौलियें के प्राथमिकी दर्ज कराना टेढ़ी खीर है फिर भी कप्तान की निगाह में ऐसे थानेदार थानों पर मलाई काट रहें हैं। ऐसा नहीं है कि कप्तान को इसकी जानकारी नहीं है, फिर भी वे यथा-स्थितीवाद के पोषक बने हुए हैं। 
             
 पुलिस अधीक्षक शैलेश पाण्डेय ने दो थानेंदारों को हटा दिया, दोनों पर नये तैनाती कर दी। सिकरारा के थानेंदार विश्वनाथ यादव को हटाकर स्वाट प्रभारी तथा सुजानगंज रूद्रभान पाण्डेय को पुलिस लाईन कर दिया गया। चर्चा है कि 15 दिन पहले राजनैतिक दबाव में कप्तान ने तबादला किया, तबादलें के क्रम में सरायख्वाजा, बदलापुर, जलालपुर थानें प्रभावित हुए। थानों पर राजनैतिक दबाव की तैनाती से लोगों के बीच हलचल पैदा कर दी है। लोग यह कहने लगे हैं कि सपा सरकार की भांति इस ‘‘संत'' सरकार में भी कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है। थानों पर थानेंदारों की आचरण और कार्यशैली आम जनता के बीच सवालिया निशान खड़ा कर रही है। जिससे अपराध कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। पुलिस छुटभईयें अपराधियों के उपर बड़े-बड़े अपराधों का खुलाशा करके जेल भेजती जा रही हैं, जिससे जनपद में अपराध रूकने का नाम नहीं ले रहा है। 

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