!! अंतर प्रदेशीय लुटेरों का गढ़ बना जौनपुर जनपद
!! जिले में वारदातें बढ़ी, लोग सुरक्षा को लेकर चिन्तित
!! विगत 25 सालों से 3 दर्जन से ज्यादा बैंक लूट, डाक घर लूट, एलआईसी लूट बने कागजों की ख़ुराक
!! आये दिन हो रहें फर्जी खुलाशें से खुली पुलिसियां कार्यशैली की पोल
जौनपुर। मनोज उपाध्याय
तहलका 24 x 7
समूचा जनपद अंतर प्रदेशीय लुटेरों का गढ़ बन गया है। इस जिले में लूट को अंजाम देना जितना आसान है, उससे ज्यादा आसानहै, पूरे लूट काण्ड को हजम कर जाना। जिले में बैंक लूट और डाकघर लूट, एलआईसी लूट करीब पचासों लाख की हुई, किन्तु पुलिस ने लूटी गई रकम का एक रूपया बरामद करना उचित नही समझा। लूट और डकैती के पूरे-के-पूरे मामले आज भी पुलिस विभाग के गुमनामी रजिस्टर में खो गए। लूटेरों के लिए बैंक व डाक घर लूट या चोरी सबसे उत्तम व सुरक्षित कार्य है। इसमें न तो बैंक प्रबन्धक या चेयरमैन ज्यादा हाय-तौबा मचाता है, और न तो पुलिस ही परेशान होती है। वजह साफ है कि बैंक का पूरा का पूरा रूपये का बीमा होता है, इसलिए पुलिस और बैंक व वित्तीय संस्थान से सम्बन्धित लोग मौनब्रत धारण कर लेते हैं।
इस जनपद के पुराने तथा अपराधिक वारदातों को खोलने का नया-नया तरीका इजाद करने में माहिर थानेदारों ने पिछले कुछ वर्षों से अपने पुलिस अफसरों को अपने पक्ष में लेकर नए-नए तरीके से बड़े से बड़े काण्ड का पर्दाफास कर किसी को भी बलि का बकरा बना देते हैं। लूट, डकैती, बैंक लूट आदि का पर्दाफास कर खानापूर्ति कर लेते हैं। पुलिस के बड़े अफसरों और सत्तापक्ष के नेताओं को वही रिपोर्ट सत्य लगती है जो पुलिस के अभिलेख में होती है। ये लोग किसी असत्य बात को बड़ी ही बेशर्मी से जनमंच पर लोगों को बताते हैं। विगत 25 सालों से 3 दर्जन से ज्यादा बैंक लूट, डाक घर लूट, एलआईसी लूट के मामलों को खुलाशा करने के बजाय दबा दिया गया या यह कह लिजिए कि एक का भी सही रूप में पर्दाफास नहीं किया गया। आज तक न लुटेरे पकड़े गये, न ही घटना के लिए जिम्मेदार थानेदारों का ही कुछ हो पाया,? प्रस्तुत है घटना क्रम के आकड़ें, जो पुलिस और बैंक के उच्चाधिकारीयों की कर्तव्य निष्ठा पर प्रश्न चिन्ह हैं।
!! जनपद में बैंक लूट 26 जून 1992 से चालू हुई, जब चन्दवक थाने केगोमती ग्रामीण बैंक पोखरा से लूटेरों ने असलहें के दमपर 53सौ 34 रूपये लूट लिए।
!! दुसरी घटना 20 जून 1993 को हुई, यहां भी लूटेरोंने लाइन बाजार थाने के रामदयालगंज बाजार की यूनियन बैंक आफइण्डिया की शाखा से 1 लाख 87 हजार 786 रूपये लूट लिए। फिरतो बैंक लूट का क्रम चल निकला।
!! 18 अगस्त 1993 को बदलापुर थाने के गोमती ग्रामीण बैंक सोनहिता की शाखा से 36 हजार 366 रूपये लूटा गया।
!! 19 मई 1994 को सरपतहां थाना क्षेत्र के यूनियनबैंक आफ इण्डिया की अरशिया शाखा से 1 लाख 7 हजार 482 रूपये लूट गया।
!! 14 नवम्बर 1994 को बदलापुर थाना क्षेत्र के गोमतीग्रामीण बैंक तियरा की शाखा से लूटेरों द्वारा 24 हजार 436 रूपयेलूटा गया।
!! 20 जून 1995 को जफराबाद थाना क्षेत्र के यूनियन बैंकआफ इण्डिया धर्मापुर की शाखा से 2 लाख 30 हजार 728 रूपयेलूटा गया। लूटेरों ने घटना को अंजाम देने से पहले पूरे स्टाफ कोअसलहें के दम पर कवर कर रखा था। !! 11 सितम्बर 1995 कोजफराबाद थाना क्षेत्र के इसी बैंक से पुनः लूटेरों ने 4 लाख 38 हजार 929 रूपये लूटा।
!! 4 दिसम्बर 1995 को लूटेरों ने पुलिसियां कार्यशैली की पोल-खोलते हुए सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के गोमती ग्रामीण बैंकजंग्गीपुर खुर्द की शाखा से 30 हजार रूपये लूटा।
!! 12 अगस्त 1996 को सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के गोमती ग्रामीण बैंक बैजारामपुर कीशाखा से 70 हजार लूटा गया।
!! 4 नवम्बर 1996 को महाराजगंजथाना क्षेत्र के गोमती ग्रामीण बैंक गद्दोंपुर शाखा से 27 हजार 695 लूटा गया। !! 27 जुलाई 1997 को शाहगंज थाना क्षेत्र के गोमतीग्रामीण बैंक मेढ़ा से 50 हजार लूटा गया।
!! 17 नवम्बर 1998 कोकेराकत कोतवाली के गोमती ग्रामीण बैंक अमहित से 15 हजार376 रूपये लूटा गया। इसी थाना क्षेत्र के गोमती ग्रामीण बैंक बेलावशाखा से
!! 13 जुलाई 1999 को 50 हजार लूटा गया।
!! 28 सितम्बर 1999 को बरसठी थाना क्षेत्र के गोमती ग्रामीण बैक बसहरां से 41 हजार 2 सौ रूपये लूटा गया। !! 28 मई 2000 को मछली शहर कोतवाली थाना क्षेत्र के यूबीआई बैंक की मुस्तफाबाद की शाखा से 83 हजार लूटा गया।
!! 21 जून 2001 को खुटहन थाना क्षेत्र के गोमती ग्रामीण बैंकडिहियां शाखा से लूटेरों ने 57 हजार 877 रूपये असलहें के दम परदिन दहाड़े लूटा।
!! 9 जुलाई 2002 को रामपुर थाना क्षेत्र के यूबीआईबैंक की रामपुर शाखा से 7 लाख रूपये कैशियर की दिन दहाड़े हत्याकर लूटा गया।
!! 15 नवम्बर 2002 को गौराबादशाहपुर थाना क्षेत्र के स्टेट बैंक आफ इण्डिया की आरा शाखा से 72 हजार रूपये तथा गार्ड़ की दो नाली बन्दुक भी लूटा गया जिसे पुलिस ने आज तक न तो रूपया बरामद किया और न ही दो नाली बन्दूक का पता चला।
!! 3 मई 2003 को बरसठी थाना क्षेत्र के गोमती ग्रामीण बैंक की शाखापरियत से 91 हजार 675 रूपये लूटा गया।
!! 25 मई 2003 को बक्षाथाना क्षेत्र के गोमती ग्रामीण बैंक फतेहगंज की शाखा से 3 लाख 59 हजार 510 रूपये लूटा गया।
!! 27 अक्टुबर 2003 को कोतवालीथाना क्षेत्र के भारतीय जीवन बीमा निगम की मुख्य शाखा से लूटेरों नेदिन के 12 बजें असहलें के दमपर 2 लाख 21 हजार 218 रूपयेलूटा।
!! 30 नवम्बर 2004 को कोतवाली थाना क्षेत्र के उपडाक घरउमरपुर से लूटेरों ने 27 हजार 324 रूपये लूटा।
!! 22 अगस्त 2005 को खुटहन थाना क्षेत्र के गोमती ग्रामीण बैंक बनुआडीह की शाखा से 2 लाख 17 हजार 750 रूपये लूटा गया।
!! 28 अप्रैल 2007 कोकोतवाली थाना क्षेत्र के रूहट्टा मोहल्लें से पीएसीएल कम्पनी का 31 लाख रूपये नगद बैंक जाते समय लूटेरों ने असहलें के दम पर सरेआम लूटा, पुलिस कुछ नहीं कर सकी।
!! 12 सितम्बर 2007 को पुनः इसी थाना क्षेत्र के प्रधान डाकघर से लूटेरों ने रात में ताला- तोड़कर 36 लाख रूपये उड़ा दिए। प्रधान डाकघर कोतवाली से महज 100 मीटर दूर है।
इस वारदात के बाद वैसे तो बैंक से रूपया निकालकर जा रहें या रूपया जमा कर जा रहें कई व्यक्तियों से अब तकदर्जनों वारदाते हुई, इस सारें मामलों में पुलिस ने दिखावे के लिए कुछ मामलों में फर्जी पर्दाफाष किया। जिससे न तो असली लूटेंरें पकड़े गये और न ही सही माल बरामद हो पाया। यही वजह है कि अपराध पर नियंत्रण नहीं हो रहा हैं। काफी अंतराल के बाद एक बार फिर लूटेरों के निषाने पर जलालपुर थाना कस्बे की यूबीआई बैंक रही।यहां गैस कटर से लूटरों ने खिड़की और लाकर काट कर 48 लाखरूपये नगद लूट लिया। घटना स्थल पर पुलिस के आलाधिकारियों नेमोवाईना किया किन्तु कोई सुराग हाथ नहीं लगा। अपराध औरअपराधियों को रोकने के लिए पुलिस द्वारा बनाई गई सारी रणनीतधरी की धरी रह गई, पुलिस के निष्क्रीय कार्यप्रणाली के चलते बैंकसुरक्षा भगवान भरोसे ही है। लूटेरों का मनोबल इतना बढ़ा हुआ है किबैंक गार्ड का असलहां लूटना और कर्मचारियों की हत्या तक कर देना, इनके लिए कठिन कार्य नहीं है?। सत्ता बदली ‘‘संत‘‘ सरकार आई लोगों को लगा कि अब अपराध और अपराधियों पर लगाम लगेगी, किन्तु ऐसा नहीं हुआ सरकार के सारे प्रयास फलदाई साबित नहींहुए। चार महीनें के नई सरकार के कार्यकाल के दौरान भी वारदातोंकी झड़ी लगी जिसमें चोरी, हत्या लूट, बैंक लूट, बलत्कार की घटनाएंप्रमुख रही। सरपतहां थाना क्षेत्र में सेन्ट्रल बैंक आफ इण्डिया की रूधौली शाख में बिगत महीनें चोरों ने पांच बार षटर का ताला तोड़कर बैंक लूटनें का प्रयास किया। लाइन बाजार थाना क्षेत्र के वाजिदपुर तिराहें के पास सिटी टावर में दिन दहाड़े 18 जुलाई कोतीन लूटेंरों नें महेन्द्रा फाईनेंन्ष कम्पनी में चढ़कर एक ग्राहक सेअसलहें के दम पर 38 हजार रूपयें लूटा। 25 जुलाई को मछलीशहर थाना क्षेत्र के खाखोपुर बाजार में काशी गोमती ग्रामीण बैंक में चढ़कर लूटेरों ने 2लाख 60 हजार 950 रूपयें लूटा। दोनों वारदातों में तरीका एक ही रहा। कहने के लिए बैंक में सुरक्षा के लिए पुलिस पीकेट लगती है किन्तु हकीकत तब सामनें आती है जब सुरक्षा के लिए पुलिस पीकेट लगती है किन्तु हकीकत तबसामनें आती है जब कोई वारदात हो जाती है।
वारदात की शिकार इन बैंक शाखाओं में ज्यादातर स्थानीयबैंक गोमती ग्रामीण बैंक की ही शाखाएं हैं। इस वित्तीय संस्थान केचेयरमैन की कार्यशैली की उदासीनता प्रदर्षित करती है कि जैसे इन बैंकडकैतीयों से उनका कोई वास्ता ही नहीं है। वर्तमान पुलिस अधीक्षकशैलेष कुमार पाण्डेय का कहना है कि जिले में पुलिस बल की ज्यादाकमी है फिर भी यथासम्भव उपलब्धता के आधार पर बैंक सुरक्षा के लिएपुलिस की ड्यूटी लगाई जाती है। प्रायः उसी बैंक में लूट की घटनाएं देखीजाती है जहां पुलिस नहीं रहती। ऐसी घटनाओं में लोग पुलिस को हीसबसे ज्यादा दोषी मानते हैं। वित्तीय संस्थान और बैंक पुलिस के भरोसेरहती है। वर्तामान पुलिस प्रषासन के कार्यकाल में फर्जी उपलब्घियों कीझड़ी लग रही है। प्रतिदिन प्रेस कान्फ्रेंष कर लोगों को यह बतानें केप्रयास होता है कि पुलिस गुडवर्क कर रही है। बताना उचित होगा किनवागत कप्तान के कार्यकाल में अपराध होने के बाद ‘‘दण्ड ‘‘ देने कानजरिया बदल गया है, जिससे थानेंदार थानों पर मनमानी आचरण कररहें हैं। लोगों के बीच आये दिन हो रहें पुलिस का ‘‘गुडवर्क‘‘ वारदात के सामनें पुलिसियां कार्यशैली की पोल-खोल दे रहा है।



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