!! ऐतिहासिक पोखरे में डाला जा रहा मकानों का गंदा पानी,
!! कूड़े से पाटा जा रहा ऐतिहासिक हनुमान मन्दिर के पीछे स्थित पोखरा
जौनपुर।
तहलका 24x7
एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता अभियान के माध्यम से साफ-सफाई के प्रति प्रेरित करने का संकल्प ले रखा है। वही दूसरी तरफ त्रिलोचन के लोगों के ऊपर इस साफ-सफाई अभियान का कोई असर देखने को नही मिल रहा है। त्रिलोचन बाजार से लबे सड़क के किनारे स्थित प्राचीन एतिहासिक हनुमान मन्दिर के समीप पोखरा गन्दगी कूड़े के अम्बार की जद में आ गया है। ऐतिहासिक पोखरे की साफ-सफाई काफी समय से हुई ही नहीं है। स्थानीय लोगों द्वारा ही इस ऐतिहासिक पोखरे में घरों का गंदा पानी के साथ-साथ घरों से निकला कूड़ा-कचरा भी डाला जा रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह ऐतिहासिक पोखरा अब कूड़ा डम्पिंग केंद्र में तब्दील हो चुका है।
त्रिलोचन बाजार स्थित प्राचीन पोखरे का ऐतिहासिक महत्व इस बात से मालूम पड़ता है कि पोखरे की उत्तर दिशा में मस्जिद है तथा पूरब में बाबा भोले नाथ का मन्दिर स्थित है। और पोखरे से सटा हुआ प्राचीन हनुमान मन्दिर है। कुछ वर्षो पहले तक नमाज से पहले उक्त पोखरे में ही मुस्लिम भाई वजू करते थे। वही बाजार वासी के अन्य कर्म काण्ड भी इसी ऐतिहासिक पोखरे पर ही होते थे। ऐतिहासिक पोखरे के समीप ब्याप्त गन्दगी, कूड़े के अम्बार एवं घरों से निकले गन्दे पानी ने आज पोखरे की ऐतिहासिकता पर वर्तमान समय में प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। उक्त पोखरे की हालत यह हो गई है कि स्नान करना, वजू बनाना तो दूर जानवर भी उक्त पोखरे में नही जाते है। पोखरे के उत्तर-पूरब में बसी आबादी के सैकड़ो घरो का गंदा पानी इसी पोखरे में गिरता है। आसपास के रहने वाले लोग इसी पोखरे में कूड़ा-करकट व अन्य अपशिष्ट डालते रहते है। जिसके दुर्गन्ध से राहगीरो के साथ ही बाजार वासियों को परेशानी उठानी पड़ती है।
वही पोखरे व मन्दिर मस्जिद की चारो दिशा से उसको पाटकर तेजी से अतिक्रमण किया जा रहा है,जिससे पोखरा सिकुड़ता जा रहा है। अगर प्रशासन उक्त पोखरे की साफ-सफाई करवाकर उसे अतिक्रमण मुक्त व गंदगी से मुक्त करवा सके तो पोखरे व प्राचीन हनुमान मन्दिर के आसपास पर्यटन स्थल विकसित किया जा सकता है।
उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष अनुराग वर्मा व मीडिया प्रभारी चन्दन सेठ ने बताया लोग परंपराओं को जानते हुए भी नजर अंदाज कर रहे है। यही वजह है कि गर्मी के दिनों में दूसरों की प्यास बुझाने वाला पोखरा आज खुद प्यासा है। और अपील किया कि यदि जनप्रतिनिधि, ग्रामीण एवं प्रशासन सभी मिलकर तालाबों के संरक्षण के लिए आगे आ जाएं तो निश्चित तौर पर हनुमान मन्दिर स्थित उक्त मरणासन्न ऐतिहासिक पोखरे को नया जीवन मिल जाएगा और जिससे हम सभी ही सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। श्री सेठ ने बताया कि उक्त पोखरे की दुर्दशा के बाबत कई आलाअधिकारीयों के संज्ञान में लाया गया किन्तु अभी तक किसी जनप्रतिनिधि, आलाअधिकारीयों ने उक्त ऐतिहासिक पोखरे की सुध नही ली है।



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